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खनन प्रभावित क्षेत्रों के तेज विकास के लिए परामर्श कार्यशाला आयोजित

  •  खनन जिलों को विकास की मुख्यधारा में लाने का संकल्प दोहराया

भुवनेश्वर। राज्य के खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र और तीव्र विकास के उद्देश्य से योजना एवं समन्वय विभाग, ओडिशा सरकार द्वारा ‘सीएम-संपदा’ पहल पर राज्यस्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला की अध्यक्षता मुख्य सचिव अनु गर्ग ने की।

सीएम-संपदा योजना एवं समन्वय विभाग की प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य जिला खनिज निधि (डीएमएफ) के संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए खनन प्रभावित समुदायों का तीव्र विकास सुनिश्चित करना है। यह पहल स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में संतृप्ति आधारित हस्तक्षेप पर केंद्रित है।

खनन क्षेत्रों को विकास यात्रा के केंद्र में रखने की प्रतिबद्धता

कार्यशाला में विकास आयुक्त-सह-अपर मुख्य सचिव देवरंजन कुमार सिंह, 12 विभागों के प्रतिनिधि तथा 11 डीएमएफ जिलों के कलेक्टर उपस्थित रहे। बैठक में प्रस्तावित हस्तक्षेपों और उनके क्रियान्वयन की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार खनन प्रभावित क्षेत्रों को ओडिशा की विकास यात्रा के केंद्र में रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएम-संपदा के सफल क्रियान्वयन के लिए खनन जिले और संबंधित विभाग साझा दृष्टि के साथ समन्वित प्रयास करें। उन्होंने समानता और समावेशी विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए खनन गांवों में विकास की गति तेज करने पर जोर दिया।

कौशल विकास और उद्यमिता पर विशेष बल

विकास आयुक्त सिंह ने कहा कि खनन ओडिशा की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और राज्य की जिम्मेदारी है कि खनन प्रभावित समुदायों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाया जाए। उन्होंने कौशल विकास और उद्यमिता को दीर्घकालिक स्थिरता का आधार बताते हुए डीएमएफ संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर बल दिया।

समयबद्ध और परिणामोन्मुखी कार्ययोजना पर चर्चा

बैठक में खनन प्रभावित गांवों में सरकारी योजनाओं और सेवाओं की पूर्ण संतृप्ति सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने पर विचार-विमर्श हुआ। जिला-विशिष्ट परिस्थितियों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न हस्तक्षेपों की व्यवहार्यता और संभावित प्रभाव पर भी चर्चा की गई। प्राप्त सुझावों और मार्गदर्शन के आधार पर सीएम-संपदा के ढांचे को और सुदृढ़ किया जाएगा। मजबूत जिला-विभागीय समन्वय और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के माध्यम से ‘विकसित ओडिशा’ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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