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बुनकरों और शिल्पियों के लिए समृद्धि का महाकुंभ बनेगा ‘20वां ग्रैंड तोशाली स्वदेशी मेला’
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20 राज्यों के कारीगर होंगे शामिल
भुवनेश्वर। राज्य के हस्तकरघा, वस्त्र एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से आयोजित होने वाला 20वां ग्रांड तोशाली स्वदेशी मेला इस वर्ष बुनकरों और शिल्पकारों के लिए “समृद्धि का महाकुंभ” साबित होगा। यह बात हस्तकरघा, वस्त्र एवं हस्तशिल्प मंत्री प्रदीप बलसामंत ने गीत गोविंद सदन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कही।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिल्पकारों और बुनकरों के आजीविका सशक्तिकरण तथा आर्थिक उन्नयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह मेला न केवल पारंपरिक कला को बढ़ावा देगा बल्कि शिल्पकारों के लिए विपणन का बड़ा मंच भी प्रदान करेगा।
स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत थीम पर भव्य आयोजन
हस्तकरघा, वस्त्र एवं हस्तशिल्प विभाग द्वारा 14 से 26 फरवरी 2026 तक जनतामैदान, भुवनेश्वर में आयोजित इस मेले की थीम इस वर्ष “स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत” रखी गई है। ओडिशा सहित देश के 20 राज्यों के बुनकर और शिल्पकार इसमें भाग लेकर अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगे।
विभागीय आयुक्त-सह-सचिव गुहा पूनम तापस कुमार ने कहा कि यह मेला हमारी समृद्ध हस्तकरघा और हस्तशिल्प विरासत का जीवंत प्रतीक बनेगा और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के साथ-साथ विपणन का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगा।
905 स्टॉल, पहली बार एमएसएमई उत्पाद भी शामिल
इस वर्ष मेले में कुल 905 स्टॉल लगाए गए हैं। भारत सरकार के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के सहयोग से 150 हस्तशिल्प स्टॉल तथा विकास आयुक्त (हस्तकरघा) की ओर से 50 स्टॉल, राज्य सरकार के हस्तशिल्प एवं वस्त्र निदेशालय के तहत 281 शिल्पकार और 150 बुनकर तथा पहली बार 200 एमएसएमई स्टॉल, जिनमें विद्युत उपकरण, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, ऑटोमोबाइल, घरेलू उपकरण आदि उपलब्ध होंगे।
60 स्टॉल में होगा स्वदेशी व्यंजनों का स्वाद
बोयोनिका, संबलपुरी बस्त्रालय, रेशम ओडिशा और उत्कलिका के लिए विशेष 4 स्टॉल लगाए गए हैं। वहीं,सीडैक और एसएडीएचएसी जैसी प्रमुख संस्थाएं अपने विशेष प्रयासों और योजनाओं का प्रदर्शन करेंगी।
थीम पवेलियन, लाइव डेमो और ड्रोन शो आकर्षण का केंद्र
हस्तकरघा, वस्त्र और रेशम के लिए तीन अलग-अलग थीम पवेलियन तैयार किए गए हैं, जिनमें सरकारी योजनाओं की सफलता गाथाएं और नई पहलों को प्रदर्शित किया जाएगा। मेले में शिल्पकारों द्वारा लाइव डेमोंस्ट्रेशन, 24 फरवरी को कालाभूमि में 1000 टेराकोटा कलाकारों की भव्य प्रतियोगिता, राज्य की समृद्ध कला पर आधारित फैशन शो (पहली बार), और पहली बार ड्रोन शो भी आकर्षण का केंद्र होंगे।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की संध्या, रोज़ाना सेमिनार
प्रतिदिन शाम 6 बजे से 9:30 बजे तक ओडिशी, गोटीपुआ सहित देशभर के पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। “स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत” विषय पर प्रतिदिन सेमिनार भी होंगे। मेला प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक तथा शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहेगा। दोपहर 2 से 4 बजे तक गर्मी के कारण मेला बंद रहेगा।
दिव्यांगों और महिलाओं के लिए खास व्यवस्था
मेले को पर्यावरण अनुकूल और सभी के लिए सुलभ बनाया गया है। अग्निशमन, सुरक्षा, सिविल डिफेंस, प्राथमिक उपचार, एम्बुलेंस, पेयजल, शौचालय और एटीएम की व्यवस्था होगी। दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष हेल्प डेस्क और व्हीलचेयर होगा। महिलाओं शिल्पकारों और बुनकरों के लिए निःशुल्क आवास एवं परिवहन होगा। विशेष बाल देखभाल केंद्र भी होगा।
30 लाख दर्शकों और 30 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद
इस वर्ष मेले में लगभग 30 लाख आगंतुकों के आने और करीब 30 करोड़ रुपये के कारोबार की संभावना जताई गई है। यह आयोजन राज्य सरकार के हस्तकरघा, वस्त्र एवं हस्तशिल्प विभाग द्वारा भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) और विकास आयुक्त (हस्तकरघा) के सहयोग से किया जा रहा है। प्रेस वार्ता में अपर सचिव प्रताप चंद्र होता, हस्तशिल्प निदेशक डॉ. निवेदिता पृष्टि, हस्तकरघा एवं वस्त्र निदेशक सूर्य नारायण पटनायक, संयुक्त सचिव ममता नायक, उप सचिव सुव्रत कुमार बेहरा, पीआरओ अलोक कुमार मोहंती सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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