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असम, मिजोरम और महाराष्ट्र तक ओरंगुटान तस्करी के तार की तलाश

  •     असम, मिजोरम और महाराष्ट्र में पहले भी हुई थी ओरंगुटान की बरामदगी

  •     बालेश्वर के भोगराई जंगल से मिले थे पांच शिशु ओरंगुटान

  •     काले एसयूवी की भूमिका भी जांच के घेरे में

भुवनेश्वर। ओडिशा के बालेश्वर जिले के भोगराई इलाके के जंगल से पांच शिशु ओरंगुटान मिलने के मामले की जांच अब दूसरे राज्यों तक पहुंच गई है। ओडिशा स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) इन ओरंगुटानों के ओडिशा पहुंचने के संभावित रास्ते का पता लगाने के लिए असम, मिजोरम और महाराष्ट्र पुलिस से संपर्क करने की तैयारी कर रही है। इन तीनों राज्यों में पहले भी ओरंगुटान बरामद होने के मामले सामने आ चुके हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन पुराने मामलों से मिले सुराग वर्तमान मामले की कड़ियों को जोड़ने में मदद कर सकते हैं।

जांच के दौरान सामने आया है कि वर्ष 2022 में असम के कछार जिले से दो शिशु ओरंगुटान बरामद किए गए थे। इसके बाद अक्टूबर 2023 में मिजोरम के आइजोल जिले में एक ओरंगुटान मिला था। वर्ष 2024 में महाराष्ट्र के ठाणे जिले के डोंबिवली में एक अपार्टमेंट से भी ओरंगुटान बरामद किया गया था।

बालेश्वर के जंगल से एक साथ पांच शिशु ओरंगुटान मिलने के बाद वन्यजीव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से संभावित संबंध की आशंका को गंभीरता से लिया जा रहा है। एसटीएफ पहले के मामलों में शामिल अधिकारियों से जानकारी जुटाकर यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि इन मामलों में जानवरों का स्रोत और उनकी आवाजाही का कोई संबंध वर्तमान मामले से है या नहीं।

पश्चिम बंगाल पुलिस भी कर रही है सहायता

जांच में पश्चिम बंगाल पुलिस भी ओडिशा एसटीएफ की सहायता कर रही है। इससे यह संभावना भी महत्वपूर्ण हो गई है कि ओरंगुटानों को ओडिशा तक पहुंचाने के लिए दूसरे राज्यों से होकर कोई मार्ग इस्तेमाल किया गया हो।

दीघा के होटल तक पहुंची गाड़ी

एसटीएफ ने पहले प्राप्त सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की है। फुटेज में बालेश्वर के जंगल के आसपास एक काली एसयूवी दिखाई देने की बात सामने आई है। पुलिस को संदेह है कि इस वाहन का इस्तेमाल ओरंगुटानों को जंगल तक पहुंचाने में किया गया हो सकता है। बताया जा रहा है कि यह वाहन थार था और इसकी गतिविधियों को पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित एक होटल तक ट्रैक किया गया।

हालांकि, जांच एजेंसियां अभी यह पुष्टि नहीं कर पाई हैं कि वाहन में सवार लोग वास्तव में ओरंगुटानों को ओडिशा लाने या उन्हें बालेश्वर के जंगल में छोड़ने में शामिल थे या नहीं। इसलिए वाहन और उसमें सवार लोगों की भूमिका को लेकर जांच जारी है।

एसटीएफ अब विभिन्न राज्यों की पुलिस और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर यह पता लगाने में जुटी है कि पांचों ओरंगुटान कहां से आए, उन्हें ओडिशा तक किस माध्यम से लाया गया और इसके पीछे किसी संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह की भूमिका थी या नहीं।

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