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अब खुले बाड़े में होंगे स्थानांतरित
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शीशे के बाड़े से खुले परिसर में ले जाने की तैयारी
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क्वारंटीन जारी रहेगा, पर्यटकों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध बरकरार
भुवनेश्वर। बालेश्वर जिले के जंगल से बचाए गए पांचों शिशु ओरंगुटान की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार के बाद उन्हें भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में शीशे के बाड़े से खुले बाड़े में स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार, खुले परिसर में रखने का उद्देश्य ओरंगुटानों को धीरे-धीरे नए वातावरण के अनुकूल होने में मदद करना है। हालांकि, खुले बाड़े में स्थानांतरित किए जाने के बाद भी सभी ओरंगुटान क्वारंटीन में रहेंगे और पर्यटकों के लिए उन तक पहुंच पर प्रतिबंध जारी रहेगा।
सामान्य रूप से भोजन कर रहे
नंदनकानन के अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि पांचों ओरंगुटानों की हालत फिलहाल काफी हद तक स्थिर है और वे नए वातावरण में अच्छी तरह प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सभी सामान्य रूप से भोजन कर रहे हैं। उन्हें परिसर में आराम से घूमते और खेलते हुए भी देखा गया है।
स्वास्थ्य में सुधार को देखते हुए ही उन्हें खुले बाड़े में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, इस दौरान उनकी सेहत पर लगातार निगरानी रखी जाएगी ताकि नए वातावरण में बदलाव का उन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
मल के नमूनों की भी जांच
दो नर ओरंगुटानों के मल के नमूनों की भी जांच की जा रही है, ताकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत आकलन किया जा सके। पांचों के शरीर का तापमान नियमित रूप से थर्मल कैमरों के माध्यम से जांचा जा रहा है। नंदनकानन के उपनिदेशक के अनुसार, यह निगरानी उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखने की व्यवस्था का हिस्सा है।
एक ओरंगुटान को आया बुखार
सोमवार को पांच में से एक ओरंगुटान को बुखार हो गया था। इसके बाद चिकित्सा टीम ने उसकी निगरानी और बढ़ा दी। बीमार ओरंगुटान को विशेष निगरानी में रखा गया है, जबकि बाकी चार की भी नियमित जांच की जा रही है।
इससे पहले गैस की समस्या सामने आने के बाद पांचों ओरंगुटानों को हर तीन घंटे में भोजन देने की व्यवस्था की गई है। क्वारंटीन कक्ष के चारों ओर वायर मेश भी लगाया गया है, ताकि मच्छर अंदर न आ सकें और शिशु ओरंगुटानों को संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके।
देखभाल के लिए पांच सदस्यीय तकनीकी समिति गठित
पांचों ओरंगुटानों के स्वास्थ्य, कल्याण और प्रबंधन की निगरानी के लिए पांच सदस्यीय तकनीकी समिति का गठन किया गया है। यह समिति प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (पीसीसीएफ) की ओर से गठित की गई है। इसमें ओरंगुटानों की देखभाल का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ शामिल हैं।
नंदनकानन के निदेशक को समिति का संयोजक बनाया गया है। समिति पांचों शिशु ओरंगुटानों की देखभाल की व्यवस्था की निगरानी करने के साथ उनके प्रबंधन को लेकर तकनीकी सलाह भी देगी। तकनीकी टीम के जल्द नंदनकानन पहुंचकर ओरंगुटानों की स्थिति और देखभाल की व्यवस्थाओं का आकलन करने की भी संभावना है।
जल्द रखा जा सकता है पांचों ओरंगुटानों का नाम
इस बीच, नंदनकानन प्रशासन पांचों ओरंगुटानों का नाम रखने पर भी विचार कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, नए वातावरण में उनके धीरे-धीरे सहज होने के बाद आने वाले दिनों में नामकरण किया जा सकता है।
बालेश्वर के जंगल से बचाए जाने के बाद पांचों ओरंगुटानों को नंदनकानन लाया गया था, जहां उन्हें अब तक विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया है। स्वास्थ्य में सुधार के बावजूद प्रशासन फिलहाल किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता और क्वारंटीन तथा चिकित्सकीय निगरानी जारी रखते हुए उन्हें धीरे-धीरे सामान्य वातावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
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