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चंद्रमा ने कुछ देर के लिए शुक्र को ढका
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ओडिशा के आसमान में दिखा दुर्लभ खगोलीय नजारा
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भुवनेश्वर समेत राज्य के कई हिस्सों में लोगों ने नंगी आंखों से देखा अद्भुत दृश्य
भुवनेश्वर। ओडिशा समेत दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में सोमवार शाम आसमान में एक दुर्लभ खगोलीय घटना ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। अर्धचंद्राकार चंद्रमा कुछ समय के लिए चमकीले शुक्र ग्रह के सामने आ गया और उसे पूरी तरह ढक लिया। इस घटना को ‘लूनर ऑकल्टेशन ऑफ वीनस’ यानी चंद्रमा द्वारा शुक्र ग्रह का आच्छादन कहा जाता है। खगोल विज्ञान में इसे एक दुर्लभ और आकर्षक घटना माना जाता है।
करीब 85 मिनट तक चंद्रमा के पीछे छिपा रहा शुक्र
खगोलीय घटना शाम करीब 5:20 बजे भारतीय समयानुसार शुरू हुई, जब चंद्रमा पृथ्वी और शुक्र ग्रह के बीच आ गया। इसके बाद शुक्र ग्रह चंद्रमा की चमकीली सतह के पीछे पूरी तरह छिप गया। करीब 6:45 बजे शुक्र दोबारा चंद्रमा के प्रकाशित किनारे से बाहर दिखाई दिया।
शाम के धुंधलके में चंद्रमा और शुक्र के इस अद्भुत संयोग ने आसमान को बेहद आकर्षक बना दिया। भुवनेश्वर समेत ओडिशा के कई जिलों में शाम करीब 6:45 से 7:30 बजे के बीच मौसम साफ रहने के कारण लोगों को क्षितिज के करीब इस खगोलीय दृश्य को देखने का अच्छा अवसर मिला। कई लोगों ने बिना किसी दूरबीन के भी चंद्रमा के पास चमकते शुक्र ग्रह को देखा।
भारत में कई वर्षों के अंतराल पर मिलता है ऐसा अवसर
पूर्व पठानी सामंत तारामंडल के उपनिदेशक और जाने-माने विज्ञान संचारक डॉ शुभेंदु पटनायक के अनुसार, शुक्र ग्रह का चंद्रमा के पीछे छिपना यानी लूनर ऑकल्टेशन वैश्विक स्तर पर वर्ष में एक या दो बार हो सकता है, लेकिन किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से इसे देख पाना काफी दुर्लभ होता है। भारत जैसे किसी विशेष स्थान से ऐसी घटना आमतौर पर कई वर्षों के अंतराल के बाद दिखाई देती है।
यह खगोलीय घटना दक्षिण और मध्य भारत के कुछ हिस्सों के अलावा दक्षिणी यूरोप, मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और एशिया के कुछ क्षेत्रों में भी दिखाई दी।
डॉ पटनायक के अनुसार, शुक्र के अगले चंद्र आच्छादन की घटना 7 नवंबर 2026 को निर्धारित है, लेकिन यह दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी छोर से ही दिखाई देगी। ऐसे में भारत और ओडिशा के आकाश में दिखाई दिया यह नजारा खगोल प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है।
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