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दीघा के होटल मालिक और उसके बेटे की भूमिका संदेह के घेरे में
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सीसीटीवी फुटेज और काले एसयूवी से जुड़ी कड़ियों की जांच तेज
बालेश्वर। ओडिशा के बालेश्वर जिले के विचित्रपुर और भोगराई क्षेत्र के जंगल से पांच शावक ओरंगुटान मिलने के सनसनीखेज मामले की जांच अब पश्चिम बंगाल तक पहुंच गई है। ओडिशा वन विभाग, विशेष कार्यबल (एसटीएफ) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) की संयुक्त जांच में पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित एक होटल कारोबारी और उसके बेटे की भूमिका संदेह के घेरे में आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बोर्नियो और सुमात्रा के वर्षावनों में पाए जाने वाले इन दुर्लभ वन्यजीवों को ओडिशा तक कैसे लाया गया और इनके पीछे काम कर रहे अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह की कड़ियां कहां तक फैली हैं।
काले एसयूवी और सीसीटीवी फुटेज से मिली अहम कड़ी
जांच में दीघा के ग्रैंड हेरिटेज होटल के मालिक जयंत मैती का नाम सामने आया है। वह हावड़ा के आंदुल का निवासी बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां उसके बेटे सौम्यदीप मैती की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। मामले की जांच में एक काले एसयूवी वाहन को महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है, जिसका मैती दूसरे मालिक के रूप में दर्ज है।
स्थानीय रिपोर्टों और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार यह वाहन 7 सितंबर की देर रात विचित्रपुर क्षेत्र में दिखाई दिया था। बताया गया है कि वाहन करीब रात 11.25 बजे इलाके से गुजरता हुआ देखा गया और लगभग 11.40 बजे वापस लौट गया। इसके अगले दिन 8 सितंबर को तटीय जंगल में पांच छोटे ओरंगुटान लावारिस हालत में पाए गए।
जांच को आगे बढ़ाते हुए एसटीएफ ने दीघा स्थित होटल पर छापा मारकर वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की हार्ड डिस्क जब्त की है। जांच अधिकारी डिजिटल फुटेज के जरिए संदिग्धों की गतिविधियों और वाहनों की आवाजाही का क्रम जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
होटल से जंगल तक संदिग्ध आवाजाही
जांच में यह भी सामने आया है कि होटल में कथित तौर पर छह संदिग्ध तस्कर ठहरे थे, लेकिन उनमें से केवल तीन ने होटल के रजिस्टर में अपनी जानकारी दर्ज कराई थी। नए सीसीटीवी फुटेज में होटल के आसपास देर रात एक काले थार और सफेद कार की संदिग्ध आवाजाही दिखाई देने की बात सामने आई है।
एक उर्वरक दुकान के सुरक्षा कैमरे में काले थार को बादापाही जंगल की दिशा में जाते हुए देखा गया। जांच के अनुसार दीघा से घटनास्थल की करीब 22 किलोमीटर की दूरी वाहन ने लगभग आधे घंटे में तय की और कुछ ही देर बाद वापस लौट आया। एक अन्य सीसीटीवी फुटेज में सफेद कार से कुछ संदिग्ध बक्सों को काले एसयूवी में स्थानांतरित करते हुए देखा गया। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन बक्सों में ओरंगुटान के पिंजरे हो सकते हैं। हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए फुटेज और वाहनों की विस्तृत जांच की जा रही है।
होटल मालिक और बेटे की तलाश, तीन कर्मचारी हिरासत में
मामले में होटल के तीन कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इनमें काले थार का चालक भी शामिल बताया जा रहा है। दूसरी ओर होटल मालिक जयंत मैती और उसका बेटा सौम्यदीप मैती जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं। एसटीएफ की कई टीमें स्थानीय पुलिस की मदद से दीघा, हावड़ा और कोलकाता में संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही हैं।
नंदनकानन में निगरानी में रखे गए ओरंगुटान
जंगल से सुरक्षित बरामद किए गए पांचों ओरंगुटान को भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन प्राणी उद्यान ले जाया गया है, जहां पशु चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार और स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। विशेषज्ञों के लिए भी यह मामला बेहद असामान्य है, क्योंकि ओरंगुटान भारत के मूल निवासी नहीं हैं और प्राकृतिक रूप से मुख्य रूप से बोर्नियो तथा सुमात्रा के वर्षावनों में पाए जाते हैं।
जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन विदेशी वन्यजीवों को कहां से हासिल किया गया, उन्हें भारत तक किस माध्यम से लाया गया, किन रास्तों से ओडिशा पहुंचाया गया और आखिर इन्हें कहां ले जाने की योजना थी। होटल, संदिग्ध वाहनों, सीसीटीवी फुटेज और हिरासत में लिए गए कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर जांच एजेंसियां कथित वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी हैं।
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