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पोट्टांगी की झंकरगुड़ा में स्वास्थ्य संकट के दौरान सामने आई बदहाल सड़क व्यवस्था
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परिजनों ने बांस के झूले से पहुंचाया राष्ट्रीय राजमार्ग
कोरापुट। जिले के पोट्टांगी ब्लॉक के झंकरगुड़ा गांव में सड़क सुविधा के अभाव ने एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने ला दी। बीमार आदिवासी महिला को इलाज के लिए करीब 7 किलोमीटर तक लकड़ी और बांस से बने अस्थायी झूले में ले जाना पड़ा। गांव तक वाहन या एंबुलेंस नहीं पहुंच पाने के कारण परिजनों और ग्रामीणों ने महिला को झूले में उठाकर राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंचाया। इसके बाद ऑटो-रिक्शा से उसे इलाज के लिए पड़ोसी आंध्र प्रदेश के सालुर अस्पताल ले जाया गया।
एंबुलेंस नहीं पहुंची तो ग्रामीणों ने संभाली जिम्मेदारी
बताया गया कि महिला कई दिनों से बीमार होने के कारण बिस्तर पर थी। झंकरगुड़ा तक मोटर वाहन के पहुंचने लायक सड़क नहीं होने के कारण परिवार के सामने उसे अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया। आखिरकार परिजनों और ग्रामीणों ने बांस के झूले की मदद से महिला को करीब 7 किलोमीटर तक पैदल ले जाकर राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंचाया। वहां से ऑटो-रिक्शा के जरिए उसे सालुर स्थित अस्पताल ले जाया गया।
झंकरगुड़ा में मुख्य रूप से आदिवासी परिवार रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव आज भी बुनियादी सड़क संपर्क और कई सरकारी कल्याणकारी सुविधाओं से वंचित है। सड़क निर्माण के लिए ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
प्रशासनिक दौरे के बाद भी नहीं बदली स्थिति
झंकरगुड़ा की बदहाल स्थिति करीब दो महीने पहले भी सामने आई थी। इसके बाद पोट्टांगी के बीडीओ राम कृष्ण नायक के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने स्थानीय सरपंच और समिति सदस्यों के साथ 11 अगस्त 2026 को गांव का दौरा किया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि प्रशासनिक अधिकारियों के दौरे के बाद सड़क और बुनियादी सुविधाओं की समस्या का समाधान होगा।
हालांकि, ग्रामीणों के अनुसार जमीनी स्थिति में अब तक कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आया है। स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में आज भी ग्रामीणों को मरीजों को कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। झंकरगुड़ा के लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि आखिर कब उनके गांव तक पक्की सड़क पहुंचेगी और गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में मरीजों को इस तरह जोखिम उठाकर अस्पताल ले जाने की मजबूरी खत्म होगी।
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