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नुआखाई पर्व को लेकर ओडिशा में उत्साह

  •  राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष ने दी शुभकामनाएं

  •  नई फसल के अन्न को देवी-देवताओं को अर्पित कर मनाया जाता है नुआखाई

  •   सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है पर्व

भुवनेश्वर। पश्चिमी ओडिशा के प्रमुख कृषि एवं लोकपर्व नुआखाई को लेकर पूरे प्रदेश में उत्साह का माहौल है। नई फसल के अन्न को देवी-देवताओं को अर्पित करने के बाद परिवार और समुदाय के साथ पर्व मनाने की परंपरा वाले इस त्योहार के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपाटी, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। पश्चिमी ओडिशा के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी नुआखाई हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को देशवासियों, विशेष रूप से ओडिशा के लोगों को नुआखाई की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नुआखाई केवल एक पारंपरिक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने वाला पर्व भी है। सामूहिक भोज, परिवार के सदस्यों तथा मित्रों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर पर्व मनाने की परंपरा इसके सामाजिक महत्व को दर्शाती है।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि नुआखाई के माध्यम से आपसी सद्भाव और एकता और मजबूत होगी। उन्होंने इस पावन अवसर पर सभी के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

राज्यपाल, मुख्यमंत्री और नवीन पटनायक ने दी ‘नुआखाई जुहार’

ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपाटी ने नुआखाई को पश्चिमी ओडिशा की समृद्ध संस्कृति और परंपरा का प्रतीक बताया। उन्होंने प्रदेशवासियों को नुआखाई जुहार की शुभकामनाएं देते हुए मां करुणामयी से सभी को सुखी रखने की प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने नुआखाई को कृषि आधारित लोकपर्व बताते हुए प्रदेशवासियों को बधाई और जुहार दी। उन्होंने कामना की कि मां समलेश्वरी की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आए।

वहीं, विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने भी पवित्र नुआखाई पर्व पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। उन्होंने अपने संदेश का समापन ‘जय मां समलेई’ के उद्घोष के साथ किया।

पुरी समुद्र तट पर सुदर्शन पटनायक ने बनाई आकर्षक बालू कला

नुआखाई के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध पद्मश्री सम्मानित बालू कलाकार सुदर्शन पटनायक ने पुरी समुद्र तट पर आकर्षक बालू कला बनाकर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उनकी कलाकृति में पारंपरिक संबलपुरी परिधान में एक महिला को प्रार्थना करते हुए दिखाया गया है। इसके साथ मां समलेश्वरी की लाल रंग की गोलाकार आकृति, फूलों की सजावट और नई कटी धान की सुनहरी बालियां दिखाई गई हैं।

कलाकृति पर ‘नुआखाई जुहार’ लिखा गया है और पीछे बंगाल की खाड़ी का दृश्य इसे और आकर्षक बना रहा है। यह रचना कृतज्ञता, समृद्धि और नई फसल के स्वागत का संदेश देती है।

नुआखाई के अवसर पर पश्चिमी ओडिशा में लोग मौसम की पहली फसल से प्राप्त नए अन्न यानी नवांन्न को देवी-देवताओं को अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। इसके बाद परिवार, रिश्तेदारों और समुदाय के लोगों के साथ मिलकर पर्व मनाया जाता है। इस तरह नुआखाई केवल नई फसल के स्वागत का पर्व नहीं, बल्कि ओडिशा की कृषि परंपरा, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक भी है।

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