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अक्टूबर-दिसंबर में 83% अधिक तूफानी ऊर्जा का अनुमान
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उत्तर-पश्चिम भारत से 19 सितंबर के आसपास मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना
भुवनेश्वर। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही देश के पूर्वी तट पर चक्रवाती गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, मानसून की वापसी करीब 19 सितंबर से उत्तर-पश्चिम भारत, विशेषकर पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से शुरू होने की संभावना है। हालांकि, पूर्वी भारत और विशेष रूप से ओडिशा में मानसूनी गतिविधियां कुछ समय तक जारी रह सकती हैं।
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसमी प्रणालियां बढ़ा रहीं चिंता
उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी शुरू होने के बावजूद बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण ओडिशा सहित पूर्वी भारत में बारिश का दौर बना रह सकता है। सामान्य तौर पर ओडिशा से मानसून की पूरी तरह विदाई 10 से 15 अक्टूबर के बीच होती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार सितंबर के अंतिम सप्ताह तक मानसून की ताकत धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती है, लेकिन ओडिशा से मानसून की वास्तविक विदाई की सटीक तारीख अभी निर्धारित नहीं हुई है।
मानसून की वापसी के बाद अक्टूबर से दिसंबर के बीच समुद्र की सतह का तापमान बढ़ना और ऊपरी व निचले वायुमंडल के बीच हवाओं की गति एवं दिशा में अंतर यानी वर्टिकल विंड शीयर का कम होना चक्रवातों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करता है। ऐसी स्थिति में बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनने वाला कमजोर निम्न दबाव क्षेत्र भी तेजी से ताकत हासिल कर सकता है।
तीन चक्रवात बनने की संभावना
अक्टूबर से दिसंबर के दौरान इस वर्ष उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र, जिसमें बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों शामिल हैं, में करीब तीन चक्रवात बनने का अनुमान जताया गया है। चक्रवातों की यह संख्या ऐतिहासिक औसत के अनुरूप मानी जा सकती है, लेकिन चिंता उनकी संभावित तीव्रता और कुल विनाशकारी ऊर्जा को लेकर है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (एसएसी) के आकलन के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर अवधि में इन चक्रवातों की संचयी विनाशकारी ऊर्जा 44 वर्षों के ऐतिहासिक औसत से करीब 83 प्रतिशत अधिक हो सकती है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक चक्रवात सामान्य से 83 प्रतिशत अधिक शक्तिशाली होगा। यदि कोई एक गंभीर चक्रवात लंबे समय तक अपनी चरम तीव्रता बनाए रखता है, तो वह पूरे मौसम की संचयी तूफानी ऊर्जा को काफी बढ़ा सकता है।
ओडिशा के लिए अक्टूबर-नवंबर अहम
चक्रवातों के लिहाज से ओडिशा देश के सबसे संवेदनशील तटीय राज्यों में शामिल है। विशेष रूप से अक्टूबर और नवंबर में राज्य को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होगी। यदि अत्यधिक ऊर्जावान चक्रवाती प्रणालियां ओडिशा या पूर्वी तट की ओर बढ़ती हैं, तो राज्य में तेज हवाओं के साथ अत्यधिक वर्षा, समुद्री तूफानी लहरों और तटीय इलाकों में जलभराव से लेकर व्यापक आंतरिक बाढ़ जैसी बहु-आपदा वाली स्थिति पैदा हो सकती है।
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