Home / National / मुंद्रा पोर्ट से मोहन माझी का ‘टू-कोस्ट रणनीति’ का आह्वान
MUNDRA PORT मुंद्रा पोर्ट से मोहन माझी का ‘टू-कोस्ट रणनीति’ का आह्वान

मुंद्रा पोर्ट से मोहन माझी का ‘टू-कोस्ट रणनीति’ का आह्वान

  • पूर्वी तट को भारत के अगले औद्योगिक विकास का इंजन बनाने पर जोर

भुवनेश्वर। मोहन चरण माझी ने भारत के संतुलित औद्योगिक विकास के लिए “टू-कोस्ट रणनीति” का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि देश की अगली औद्योगिक क्रांति को अब पूर्वी तट से गति मिलनी चाहिए। मुंद्रा पोर्ट के दौरे के दौरान उद्योग जगत के नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति केवल एक तटीय क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकती।

उन्होंने कहा कि भारत का विकास एकतरफा नहीं हो सकता। औद्योगिक विस्तार का अगला चरण पूर्वी तट से संचालित होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने ओडिशा को देश के पूर्वी समुद्री तट पर उभरते औद्योगिक शक्ति केंद्र के रूप में प्रस्तुत करते हुए निवेशकों से राज्य की संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।

ओडिशा में पोर्ट आधारित औद्योगिकीकरण पर फोकस

मुख्यमंत्री के साथ उद्योग मंत्री संपद चरण स्वाईं, अतिरिक्त मुख्य सचिव हेमन्त शर्मा और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुंद्रा पोर्ट के कंटेनर जेट्टी, वीएलसीसी जेट्टी, वेस्ट पोर्ट क्षेत्र, कॉपर निर्माण इकाई, सोलर सेल और विंड टर्बाइन कंपोनेंट संयंत्रों का दौरा किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिमी तट पर जो उपलब्धियां हासिल की गई हैं, अब उन्हें पूर्वी तट पर विस्तार देने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि ओडिशा के पास मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र, बेहतर कनेक्टिविटी और उद्योग समर्थक नीतियां मौजूद हैं, जो इस बदलाव को संभव बना सकती हैं।

वैश्विक व्यापार के लिए ओडिशा को बताया प्राकृतिक प्रवेश द्वार

मुख्यमंत्री ने दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया और व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साथ व्यापारिक संपर्कों के लिए ओडिशा की रणनीतिक स्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन के विविधीकरण के दौर में ओडिशा एक स्वाभाविक व्यापारिक प्रवेश द्वार बन सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 8.37 लाख करोड़ रुपये रुपये के 433 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से 2.86 लाख करोड़ रुपये रुपये के 148 प्रोजेक्ट धरातल पर उतर चुके हैं और कार्यान्वयन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा में निवेश की मंशा तेजी और बड़े पैमाने पर वास्तविक परियोजनाओं में बदल रही है। उन्होंने लॉजिस्टिक्स, रसायन, पेट्रोकेमिकल्स और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में व्यापक संभावनाओं का उल्लेख किया।

पारादीप से जुड़े भावनात्मक संबंध का उद्योग मंत्री ने किया जिक्र

उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने प्रस्तुति के दौरान पारादीप से अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं देखा है कि पारादीप पोर्ट ने ओडिशा की आर्थिक प्रगति में कितना बड़ा योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि मैं पारादीप की मिट्टी से आता हूं और मैंने प्रत्यक्ष रूप से देखा है कि इस बंदरगाह ने राज्य के आर्थिक विकास को वास्तविक और परिवर्तनकारी दिशा दी है। अब हम इसी मजबूत आधार पर पोर्ट आधारित औद्योगिकीकरण के नए चरण की शुरुआत कर रहे हैं।

पारादीप, धामरा और गोपालपुर पर आधारित औद्योगिक क्लस्टर की तैयारी

राज्य सरकार धामरा और गोपालपुर जैसे प्रमुख बंदरगाहों के माध्यम से औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने पर जोर दे रही है। इसके तहत विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड), औद्योगिक गलियारे और लॉजिस्टिक्स हब विकसित किए जा रहे हैं, ताकि विनिर्माण इकाइयों को सीधे वैश्विक बाजारों से जोड़ा जा सके।

ओडिशा को नए औद्योगिक इंजन के रूप में स्थापित करने की कोशिश

भारत जहां क्षेत्रीय संतुलित विकास और वैश्विक व्यापारिक एकीकरण को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं मुख्यमंत्री मोहन माझी की “टू-कोस्ट रणनीति” ओडिशा को केवल विकास यात्रा का सहभागी नहीं, बल्कि देश के सबसे संभावनाशील नए औद्योगिक इंजनों में से एक के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Share this news

About admin

Check Also

एएसआरएचएमसी ने 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया

ताडेपल्लीगुडेम, एएसआरएचएमसी ने आज अपने कैंपस में 80वां स्वतंत्रता दिवस शानदार तरीके से मनाया, जिसमें …