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Scrub Typhus

गाजीपुर में स्क्रब टाइफस का बढ़ा खतरा, मुहम्मदाबाद में कई मरीज बीमार

  • लगातार बुखार और कमजोरी के बाद अस्पताल पहुंच रहे मरीज, कई भर्ती

  • स्क्रब टाइफस की रिपोर्ट पॉजिटिव आने से बढ़ी चिंता

  • बुखार के साथ लिवर पर भी पड़ रहा असर

Scrub Typhus

गाजीपुर। जिले के मुहम्मदाबाद क्षेत्र में लगातार बुखार, तेज कमजोरी और शरीर में दर्द की शिकायत के साथ कई लोगों के बीमार पड़ने से चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र में कई मरीज उपचार के लिए अस्पतालों में भर्ती हैं। कुछ मरीजों की जांच में स्क्रब टाइफस संक्रमण की पुष्टि होने के बाद बीमारी को लेकर चिंता बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, मुहम्मदाबाद तहसील के तिवारीपुर समेत कई गांवों इसका प्रकोप सुनने को मिला है। हालांकि वास्तविक रोगियों की संख्या का पता डायग्नोस्टिक सेंटर की पॉजिटिव की रिपोर्ट की संख्या से ही पता चल पाएगा।

जानकारी के अनुसार, मरीजों में कई दिनों तक लगातार बुखार, कमजोरी, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, भूख कम लगना तथा सामान्य गतिविधियां करने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। कुछ मरीजों की जांच में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ी हुई तथा लिवर एंजाइम और बिलीरुबिन भी सामान्य से अधिक पाए गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि संक्रमण का असर केवल बुखार तक सीमित नहीं रह सकता और कुछ मरीजों में लिवर भी प्रभावित हो सकता है।

स्क्रब टाइफस क्या है और कैसे फैलता है?

स्क्रब टाइफस Orientia tsutsugamushi नामक जीवाणु से होने वाला संक्रमण है। यह संक्रमित माइट के काटने से फैलता है। ग्रामीण, झाड़ीदार और खेतों वाले क्षेत्रों में रहने या काम करने वाले लोगों में इसका जोखिम अधिक हो सकता है। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, मतली और कई मामलों में त्वचा पर दाने इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने पर संक्रमण गंभीर होकर लिवर, किडनी, फेफड़े और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकता है।

आईसीएमआर की गाइडलाइन में डॉक्सीसाइक्लिन प्रमुख उपचार

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICMR की रिकेट्सियल बीमारियों से संबंधित गाइडलाइन में स्क्रब टाइफस के उपचार में डॉक्सीसाइक्लिन (Doxycycline) को प्रमुख उपचार बताया गया है। ICMR की Treatment Guidelines for Antimicrobial Use in Common Syndromes में भी स्क्रब टाइफस के लिए डॉक्सीसाइक्लिन को प्राथमिक उपचार के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

ICMR की रिकेट्सियल डिजीज गाइडलाइन में वयस्क मरीजों के लिए डॉक्सीसाइक्लिन आधारित उपचार का उल्लेख है। गंभीर या जटिल मामलों में अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी के तहत इंट्रावेनस डॉक्सीसाइक्लिन का विकल्प भी दिया गया है। गर्भवती मरीजों और कुछ विशेष परिस्थितियों में चिकित्सक वैकल्पिक दवाओं का चयन कर सकते हैं। इसलिए दवा की मात्रा और अवधि मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर द्वारा निर्धारित की जानी चाहिए।

बुखार को सामान्य मानकर न करें नजरअंदाज

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लगातार कई दिनों तक रहने वाले बुखार को सामान्य मौसमी बुखार मानकर स्वयं दवा लेना उचित नहीं है। यदि बुखार के साथ अत्यधिक कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, आंखों या त्वचा में पीलापन, पेशाब कम होना, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाना चाहिए।

मुहम्मदाबाद क्षेत्र में सामने आ रहे मामलों को देखते हुए बुखार से पीड़ित मरीजों की समय पर जांच, संदिग्ध मरीजों की पहचान और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को झाड़ियों और घास वाले स्थानों पर सावधानी बरतने तथा शरीर को ढककर रखने के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।

लिवर की जांच भी जरूरी

स्क्रब टाइफस के कुछ मरीजों में लिवर प्रभावित हो सकता है और AST, ALT तथा बिलीरुबिन बढ़ सकते हैं। ऐसे मरीजों में चिकित्सक LFT सहित अन्य जांचों के माध्यम से स्थिति की निगरानी कर सकते हैं। यदि बिलीरुबिन और पित्त से संबंधित जांचें अधिक बढ़ी हों तो डॉक्टर लिवर, गॉलब्लैडर और पित्त की नलियों का अल्ट्रासाउंड कराने पर भी विचार कर सकते हैं।

मुहम्मदाबाद में सामने आ रहे मामलों के बीच अब सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है कि बुखार के मरीजों की पहचान समय पर हो, संदिग्ध मामलों की जांच की जाए और पॉजिटिव मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी में उचित उपचार मिले। समय पर पहचान और उपचार से स्क्रब टाइफस की गंभीर जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

स्रोत: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की Treatment Guidelines for Antimicrobial Use in Common Syndromes तथा DHR-ICMR की Guidelines for Diagnosis & Management of Rickettsial Diseases in India.

ICMR की आधिकारिक वेबसाइट

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