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भूमि विवादों के त्वरित समाधान और रिकॉर्ड सुधार पर सरकार का जोर
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार जल्द ही बिना पंजीकृत भूमि मामलों के निपटारे के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने जा रही है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया, जहां अधिकारियों को लंबित भूमि मामलों और प्रजा खाता-2 के तहत संशोधन मामलों के शीघ्र निपटारे के निर्देश दिए गए।
सरकार का कहना है कि नई एसओपी का उद्देश्य राज्यभर में भूमि निपटान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और एकरूप बनाना है। इसके माध्यम से भूमि प्रशासन व्यवस्था में सुधार लाने और आम लोगों को राहत देने की कोशिश की जाएगी।
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
बैठक में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
राजस्व विभाग ने भूमि रिकॉर्ड में त्रुटियों के सुधार और विवादों के निपटारे को प्रशासनिक सुधारों की प्राथमिकता में शामिल किया है। सरकार का मानना है कि इससे भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद कम होंगे।
राजस्व निरीक्षकों को दिए गए मासिक लक्ष्य
भूमि रिकॉर्ड सुधार प्रक्रिया को तेज करने के लिए विभिन्न जिलों के राजस्व निरीक्षकों को हर महीने 250 से 300 रिकॉर्ड सुधारने का लक्ष्य दिया गया है।
इसके साथ ही राज्य सरकार राजस्व प्रशासन, भूमि मामलों के निपटारे और रिकॉर्ड सुधार की कार्यक्षमता के आधार पर जिलों की रैंकिंग भी करेगी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष से लगभग 38 हजार एकड़ भूमि से जुड़े बिना पंजीकृत मामलों का निपटारा लंबित था। अब तक करीब 7 हजार एकड़ भूमि से जुड़े मामलों का समाधान कर काश्तकारी अधिकार दर्ज किए जा चुके हैं।
भुवनेश्वर में भूमि पुनर्गठन के लिए मसौदा एसओपी जारी
इधर भुवनेश्वर विकास प्राधिकरण ने टाउन प्लानिंग स्कीम 42 से 45 के तहत भूमि पुनर्गठन के लिए मसौदा एसओपी जारी किया है। यह योजना भुवनेश्वर के जोन-4 अंतर्गत बिजीपुर, कासीपुर, भगवानपुर, बलियापड़ा और पात्रपड़ा गांवों के कुछ हिस्सों को कवर करेगी।
अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य पुनर्गठित भूखंडों के निष्पक्ष और पारदर्शी पुनर्वितरण को सुनिश्चित करना तथा भू-स्वामियों को अधिकतम लाभ पहुंचाना है।
भूमि विवाद कम करने पर रहेगा फोकस
मसौदा दिशानिर्देशों में भूखंड पुनर्गठन के लिए एक समान प्रक्रिया प्रस्तावित की गई है, जिससे विवाद कम होंगे और शहरी विकास परियोजनाओं में लोगों का भरोसा बढ़ेगा। प्रस्तावित ढांचे के तहत छोटे भूखंडों का विलय, कई भू-स्वामियों द्वारा संयुक्त आवेदन तथा व्यवहार्यता के आधार पर चौड़ी सड़कों के किनारे भूखंड आवंटन जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। बीडीए ने इस मसौदे पर हितधारकों और स्थानीय निवासियों से सात दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
शहरी और राजस्व सुधारों को गति देने की तैयारी
राज्य सरकार भूमि प्रशासन और शहरी नियोजन प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। हाल ही में सरकार ने भवन निर्माण नक्शा स्वीकृति के लिए सात दिन की समय-सीमा तय की थी और अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। नई एसओपी लागू होने के बाद नागरिकों के लिए भूमि संबंधी प्रक्रियाएं आसान होने, लंबित विवादों में कमी आने और भूमि प्रशासन में जनविश्वास मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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