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हंगामे के बीच एक मिनट भी नहीं चल सकी विधानसभा
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स्कूली किताबों की गलतियों पर मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग
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एमएमडीआर संशोधन अधिनियम को लेकर कांग्रेस का विरोध
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सदन के बाहर भी विपक्ष का प्रदर्शन
भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में सामने आई गंभीर त्रुटियों और केंद्र के खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 (एमएमडीआर संशोधन एक्ट) को लेकर बीजद और कांग्रेस के सदस्यों के विरोध के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। प्रश्नकाल के दौरान हंगामे के बाद सदन को पहले दोपहर 1:10 बजे तक और इसके बाद दोबारा कार्यवाही शुरू होने के महज एक मिनट बाद शाम 4 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
पाठ्यपुस्तकों की गलतियों को लेकर बीजद का जोरदार विरोध
सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद बीजद के विधायक नई पाठ्यपुस्तकों में कथित तौर पर सामने आई गलतियों को लेकर नारेबाजी करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए। विपक्षी सदस्यों ने स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग की।
बीजद नेताओं ने पाठ्यपुस्तकों में कथित तौर पर ‘निंबुड़ा निंबुड़ा’ जैसे गलत संदर्भ, ओडिशा विधानसभा के स्थान पर कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर और ‘सुखुआ पोड़ा’ जैसे पाठों को लेकर सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आने के बावजूद जिम्मेदारी तय करने और सभी विद्यार्थियों तक संशोधित पुस्तकें पहुंचाने में सरकार ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।
बीजद ने इससे पहले भी पाठ्यपुस्तकों को वापस लेने, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री को पद से हटाने की मांग की थी। बीजद के युवा और छात्र संगठनों ने 22 सितंबर से विधानसभा के सामने दिन-रात धरना शुरू करने की घोषणा भी की थी।
एमएमडीआर संशोधन पर कांग्रेस का विरोध
दूसरी ओर, कांग्रेस विधायकों ने संसद से पारित एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2026 का विरोध करते हुए सदन में नारेबाजी की। कांग्रेस का कहना है कि संशोधन से ओडिशा के खनिज संसाधनों और उनसे जुड़े राज्य के हितों तथा राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पार्टी ने इस कानून को वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद वाहिनीपति के नेतृत्व में पार्टी के सदस्यों ने विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस और बीजद दोनों ने मानसून सत्र में एमएमडीआर संशोधन को प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी पहले ही कर ली थी। बीजद ने इस विषय पर सदन में प्रस्ताव लाने की मांग भी की है।
शोक प्रस्ताव के बाद प्रश्नकाल के दौरान शुरू हुआ हंगामा
मंगलवार को मानसून सत्र की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के बाद हुई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की ओर से पूर्व विधायकों सहित नेपाल में आई बाढ़ में मारे गए लोगों के प्रति शोक प्रस्ताव रखा गया। इसके बाद जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, बीजद और कांग्रेस के सदस्य पोस्टर और तख्तियां लेकर सदन के वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
लगातार हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने पहले सदन की कार्यवाही दोपहर 1:10 बजे तक स्थगित कर दी। इसके बाद जब सदन दोबारा बैठा तो विपक्षी सदस्यों का विरोध जारी रहा।
1:10 बजे शुरू हुई कार्यवाही, 1:11 बजे फिर स्थगित
दोपहर 1:10 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के साथ ही विपक्षी सदस्यों ने फिर नारेबाजी शुरू कर दी। विरोध के कारण सदन में सामान्य विधायी कार्य आगे नहीं बढ़ सका। स्थिति को देखते हुए कार्यवाही 1:11 बजे ही शाम 4 बजे तक स्थगित कर दी गई। इस तरह पुनः शुरू हुई कार्यवाही करीब एक मिनट ही चल सकी।
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