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आठ रैंप के जरिए प्रति घंटे 10 हजार श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन
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भीड़ नियंत्रण और सुगम दर्शन के लिए आईआईटी भुवनेश्वर ने तैयार की तकनीकी रूपरेखा
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प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में आठ रैंप बनाए जाएंगे
भुवनेश्वर। नए साल पर भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पुरी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को इस बार अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था मिलने की उम्मीद है। ओडिशा सरकार श्रीमंदिर में नए साल से पहले धाड़ी दर्शन (कतारबद्ध दर्शन) व्यवस्था लागू करने जा रही है। राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि पवित्र कार्तिक मास की समाप्ति के तुरंत बाद इस व्यवस्था को शुरू करने की तैयारी है। परियोजना से जुड़ी तकनीकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में आठ रैंप बनाए जाएंगे। इनके माध्यम से प्रति घंटे लगभग 10 हजार श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन कराने की क्षमता विकसित की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य मंदिर में भीड़ के दबाव को कम करना और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करना है।
यह कतार व्यवस्था ऐतिहासिक गरुड़ स्तंभ और बाहरी काठा (लकड़ी की बाहरी बैरिकेडिंग) के बीच स्थापित की जाएगी। इसके लिए आईआईटी भुवनेश्वर के तकनीकी सहयोग से एक विशेष तंत्र तैयार किया गया है, जो खुलने और सिमटने वाले पुल की तरह काम करेगा।
अनुष्ठान के समय स्वतः सिमट जाएंगे रैंप
नई व्यवस्था की खासियत यह होगी कि दर्शन के निर्धारित समय में रैंप खुल जाएंगे और श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। वहीं, मंदिर में नियमित अनुष्ठान शुरू होने पर यह व्यवस्था सुचारु रूप से सिमट जाएगी, ताकि धार्मिक परंपराओं और पूजा-पद्धति में कोई बाधा उत्पन्न न हो।
छत्तीस नियोग और प्रबंध समिति से अंतिम मंजूरी
व्यवस्था को लागू करने से पहले छत्तीस नियोग और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति के समक्ष इसकी अंतिम तकनीकी रूपरेखा रखी जाएगी। दोनों की समीक्षा और आवश्यक स्वीकृति के बाद इसे आधिकारिक रूप से लागू किया जाएगा।
सरकार की इस पहल से नए साल और अन्य प्रमुख अवसरों पर पुरी पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भीड़भाड़ से राहत मिलने तथा भगवान जगन्नाथ के दर्शन को अधिक व्यवस्थित बनाने की उम्मीद है।
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