-
104 शिक्षक संगठनों से मुलाकात और 90 बैठकें करने के बाद सरकार को 79 रिपोर्ट
-
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा-सिफारिशों की समीक्षा के बाद होगा उचित निर्णय
भुवनेश्वर। ओडिशा में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, हाईस्कूल और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही सेवा एवं व्यावसायिक समस्याओं को लेकर गठित उच्चस्तरीय समिति ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अशोक कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता वाली समिति ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में लोकसेवा भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कीं।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि समिति की सिफारिशों का गहनता से परीक्षण किया जाएगा और इसके बाद उचित निर्णय लिया जाएगा। सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि समिति की किन सिफारिशों को स्वीकार किया जाएगा और उन्हें लागू करने की समयसीमा क्या होगी।
शिक्षकों की समस्याओं और लंबित मांगों का विस्तृत अध्ययन करने के लिए समिति ने राज्य के विभिन्न वर्गों के 104 शिक्षक संगठनों और संघों के साथ बैठकें कीं। समिति ने कुल 90 बैठकें आयोजित कीं और विभिन्न मांगों एवं समस्याओं से संबंधित 79 रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत कीं।
समिति के समक्ष शिक्षकों ने सेवा संबंधी विभिन्न मुद्दे रखे। इनमें वेतन, विभिन्न भत्ते, सेवा शर्तें तथा सरकारी, सहायता प्राप्त और अन्य शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों से जुड़े लंबित विषय शामिल रहे।
6 दिसंबर 2025 को हुआ था समिति का गठन
उच्चस्तरीय समिति का गठन मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर 6 दिसंबर 2025 को किया गया था। बाद में 3 फरवरी 2026 को समिति का पुनर्गठन किया गया।
समिति को स्कूल एवं जनशिक्षा तथा उच्च शिक्षा विभागों के अंतर्गत आने वाले शिक्षकों की लंबे समय से लंबित सेवा एवं व्यावसायिक समस्याओं का अध्ययन करने और उनसे जुड़े समाधान के लिए सरकार को सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई थी।
अशोक त्रिपाठी और सुदर्शन नायक ने रखीं सिफारिशें
बैठक में समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार त्रिपाठी और सह-अध्यक्ष सुदर्शन नायक ने मुख्यमंत्री के समक्ष समिति की रिपोर्ट और सिफारिशें प्रस्तुत कीं।
बैठक में समिति के अन्य सदस्यों में शांतनु कुमार साहू, मनोरंजन मिश्रा और समन्वयक-सदस्य सनातन पांडा मौजूद रहे।
स्कूल और उच्च शिक्षा मंत्री भी रहे मौजूद
बैठक में स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड तथा उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज भी शामिल हुए। इसके अलावा मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त विभाग के प्रधान सचिव तथा उच्च शिक्षा और स्कूल एवं जनशिक्षा विभागों के सचिव भी बैठक में उपस्थित रहे।
शिक्षकों की लंबित मांगों पर सरकार की नजर
शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों की ओर से लंबे समय से वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों सहित विभिन्न मांगें सरकार के समक्ष उठाई जाती रही हैं। स्कूल एवं जनशिक्षा तथा उच्च शिक्षा विभागों के अधीन आने वाले अलग-अलग वर्गों के शिक्षकों ने अपनी सेवा संबंधी समस्याओं और मांगों को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित किया था।
इन्हीं मुद्दों के व्यापक अध्ययन के लिए समिति ने विभिन्न शिक्षक संगठनों के साथ चर्चा कर उनकी समस्याओं और मांगों को संकलित किया।
अब सरकार करेगी सिफारिशों की समीक्षा
रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब सरकार समिति की सिफारिशों का विभागवार परीक्षण करेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट में दिए गए सुझावों पर विचार करने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल सरकार की ओर से किस सिफारिश को स्वीकार किया जाएगा, कौन-सी मांग लागू होगी और इसके लिए कितना समय लगेगा, इस संबंध में कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है। शिक्षकों और उनके संगठनों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर रहेगी।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
