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कोरापुट के किसान उद्यमी, प्रगतिशील और मेहनती हैं : कुलपति
भुवनेश्वर। ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूओ), कोरापुट के कृषि विभाग और राजस्थान के भरतपुर स्थित आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रेपसीड-मस्टर्ड रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में बोरीगुमा के अंचला ग्राम पंचायत कार्यालय परिसर में सरसों एवं तोरिया बीज वितरण तथा कृषि प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य क्षेत्र में सरसों और तोरिया की खेती को बढ़ावा देना, किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों से परिचित कराना तथा उनकी आय में वृद्धि करना था।
अभियान के पहले चरण में बोरीगुमा और कोटपाड़ ब्लॉक के 75 किसानों को सरसों एवं तोरिया के बीज के साथ आवश्यक उर्वरक वितरित किए गए। इनका उपयोग 25 एकड़ से अधिक कृषि भूमि में खेती के लिए किया जाएगा। किसानों को वैज्ञानिक तरीके से सरसों की खेती करने की तकनीक समझाने के लिए विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के शिक्षकों ने खेतों का दौरा किया और व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया।
किसानों की आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं
किसानों को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो (डॉ) अजीत कुमार शासनी ने कहा कि अविभाजित कोरापुट क्षेत्र के किसान अत्यंत उद्यमी, प्रगतिशील और मेहनती हैं। उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर इस क्षेत्र में कृषि विकास और किसानों की आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि किसान हमारी अर्थव्यवस्था की वास्तविक रीढ़ हैं। यहां अनुसंधान और नवाचार की व्यापक संभावनाएं हैं। यह पहल केवल शुरुआत है। किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से सीयूओ उन्हें हरसंभव तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा। सरसों एवं तोरिया की खेती का विस्तार करने के लिए किसानों से परामर्श के आधार पर कोरापुट जिले में 240 एकड़ कृषि भूमि चिह्नित की गई है।”
कृषि कार्यों में महिलाओं की बढ़ रही भागीदारी
कार्यक्रम में महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए बोरीगुमा के प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) सुकांत कुमार पटनायक ने कहा कि कृषि कार्यों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नई खेती की तकनीक सीखने के प्रति उनका उत्साह सराहनीय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायक होगी और अन्य किसानों को भी इस खेती को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।
विश्वविद्यालय के कृषि विभाग की प्रमुख डॉ मंजूश्री सिंह ने किसानों को सरसों की वैज्ञानिक खेती की विधियों, इसके लाभ और आय बढ़ाने की संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्पादन बढ़ने पर विश्वविद्यालय किसानों के लिए उचित बाजार संपर्क विकसित करने की दिशा में काम करेगा। इसके अलावा, सरसों से तेल निकालने और मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने के लिए भी आवश्यक तकनीकी सहयोग दिया जाएगा। इससे किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
खेती से संबंधित आवश्यक तकनीकी परामर्श
कार्यक्रम में बीडीओ सुकांत कुमार पटनायक, अंचला ग्राम पंचायत के सरपंच दशरथी माझी, सीयूओ के कृषि विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. लोपामुद्रा बेहरा, ओडिशा लाइवलीहुड मिशन (ओएलएम) के बीपीएम प्रभारी देवेंद्र पांडा तथा समाजसेवी लक्ष्मीनारायण बक्सी सहित बोरीगुमा और कोटपाड़ ब्लॉक के किसान एवं कृषि मित्र उपस्थित थे।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। इसमें विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने किसानों की शंकाओं और सवालों का समाधान किया तथा सरसों की खेती से संबंधित आवश्यक तकनीकी परामर्श दिया।
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