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कहा- ओडिशा के जल अधिकारों से कोई समझौता नहीं
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के बयान पर प्रताप जेना ने जताई आपत्ति
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कहा-महानदी जल बंटवारे के मुद्दे को हल्के में नहीं लिया जा सकता
भुवनेश्वर। महानदी जल विवाद को लेकर ओडिशा की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के उस बयान के बाद बीजद ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने महानदी के मुद्दे को विवाद नहीं बताया था। पूर्व मंत्री एवं बीजद उपाध्यक्ष प्रताप जेना ने रविवार को जारी बयान में साय की टिप्पणी को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि महानदी को लेकर ओडिशा के हितों और जल अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बीजद ने हालांकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पुरी दौरे और भगवान जगन्नाथ के दर्शन का स्वागत किया, लेकिन उनके महानदी संबंधी बयान पर गंभीर आपत्ति जताई। पार्टी ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी से लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या राज्य की वर्तमान सरकार महानदी के मामले में ओडिशा के हितों से समझौता करने की तैयारी कर रही है।
ऊपरी हिस्से में बैराज निर्माण को लेकर पुराना विवाद
महानदी जल विवाद की प्रमुख वजह छत्तीसगढ़ में नदी के ऊपरी हिस्से में बनाए गए कई बैराजों को लेकर ओडिशा की आपत्ति है। ओडिशा का आरोप रहा है कि इन परियोजनाओं के कारण गैर-मानसून अवधि में महानदी के जल प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह मामला वर्तमान में संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है।
बैराजों की वैधता की समीक्षा की जाए
बीजद लंबे समय से मांग करता रहा है कि महानदी के ऊपरी हिस्से में बनाए गए बैराजों की वैधता की समीक्षा की जाए और ओडिशा के लिए गैर-मानसून अवधि में पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। पार्टी का कहना है कि महानदी केवल एक नदी नहीं, बल्कि ओडिशा की कृषि, पर्यावरण और बड़ी आबादी की आजीविका से जुड़ा महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है।
ओडिशा के हितों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं
प्रताप जेना ने राज्य की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार के दावों के बावजूद सत्ता में आने के करीब ढाई वर्ष बाद भी महानदी विवाद का समाधान नहीं हो सका है। उन्होंने पोलावरम परियोजना और एमएमडीआर संशोधन अधिनियम जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कई मामलों में ओडिशा के हितों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली।
जल अधिकार और पर्यावरणीय हितों को केंद्र में रखा जाना चाहिए
बीजद ने स्पष्ट किया कि महानदी को लेकर किसी भी बातचीत में ओडिशा के जल अधिकार और पर्यावरणीय हितों को केंद्र में रखा जाना चाहिए। प्रताप जेना ने कहा कि यदि प्राकृतिक संसाधनों और राज्य के हितों से समझौता करने का कोई प्रयास किया गया तो बीजद इसका विरोध करेगा और जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा।
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