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भुवनेश्वर में दो दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला
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किसानों की लागत घटाने और बेहतर मूल्य दिलाने पर सरकार का फोकस
भुवनेश्वर। ओडिशा में गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी और उत्पादक बनाने के लिए कृषि एवं किसान सशक्तीकरण विभाग की ओर से कृषि भवन, भुवनेश्वर के सभागार में ‘अधिक उत्पादकता के लिए आधुनिक गन्ना उत्पादन तकनीक’ विषय पर दो दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला शुरू हुई। राज्य क्षेत्र की ‘गन्ना विकास प्रौद्योगिकी मिशन’ योजना के तहत आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य आधुनिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना, किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से बाजार संपर्क मजबूत करना और गन्ने की उत्पादकता बढ़ाना है।
कार्यशाला में कृषि एवं किसान सशक्तीकरण तथा ऊर्जा मंत्री कनक वर्धन सिंहदेव और सहकारिता मंत्री प्रदीप बल सामंत ने किसानों को संबोधित किया। इस अवसर पर कृषि विभाग के आयुक्त-सह-सचिव सचिन रामचंद्र जाधव, ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ प्रभात कुमार राउल, कृषि निदेशक शुभम सक्सेना, मृदा संरक्षण निदेशक सुब्रत कुमार पंडा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कम लागत में अधिक उत्पादन लक्ष्य
उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने कहा कि ओडिशा में गन्ने की खेती ग्रामीण आजीविका को बदलने की व्यापक क्षमता रखती है। आधुनिक कृषि पद्धतियों, सटीक सिंचाई तकनीक और अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों को अपनाकर राज्य में गन्ने की औसत उत्पादकता को काफी बढ़ाने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि गन्ना विकास प्रौद्योगिकी मिशन के माध्यम से अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों को सीधे खेतों तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें। सरकार का जोर खेती की लागत कम करने के साथ किसानों की आय बढ़ाने पर है।
किसान उत्पादक संगठनों से मजबूत होगा बाजार संपर्क
सहकारिता मंत्री प्रदीप बल सामंत ने कहा कि गन्ना किसानों को सहकारी व्यवस्था और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) से जोड़ना जरूरी है। इससे किसानों को सीधे बाजार से जुड़ने और बेहतर लाभ प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि चीनी मिलों, अनुसंधान संस्थानों और एफपीओ के बीच बेहतर समन्वय से समय पर गन्ने की खरीद, चीनी की बेहतर रिकवरी और किसानों के लिए पारदर्शी मूल्य व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी।
प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों पर विशेष ध्यान
कार्यशाला में कटक, ढेंकानाल, गंजाम, जाजपुर और कलाहांडी जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में आधुनिक तकनीकों के प्रसार पर विशेष जोर दिया गया। वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधे संवाद के माध्यम से खेतों में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं और उनके तकनीकी समाधान पर चर्चा की गई।
उन्नत किस्म से सिंचाई और मशीनीकरण तक चर्चा
कार्यशाला में आईसीएआर-आईआईएसआर, आईसीएआर-एसबीआई, आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूएम, ओयूएटी और आईसीएआर-सीआरआरआई जैसे राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिक तकनीकी सत्र ले रहे हैं। इनमें अधिक उत्पादन देने वाली गन्ने की किस्मों, मृदा स्वास्थ्य, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट प्रबंधन, सटीक सिंचाई और कृषि मशीनीकरण जैसे विषयों पर विशेषज्ञ जानकारी दी जा रही है।
कार्यशाला के दौरान गन्ना उत्पादन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पांच प्रगतिशील किसानों को सम्मानित कर पुरस्कृत भी किया गया।
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