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मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी आबू धाबी पहुंचे
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11 सितंबर तक निवेशकों और उद्योग जगत के प्रमुख लोगों से होगी मुलाकात
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विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और उभरते उद्योगों पर रहेगा जोर
आबू धाबी। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी मंगलवार को आबू धाबी पहुंचे। इसके साथ ही संयुक्त अरब अमीरात में ओडिशा के उच्चस्तरीय निवेश संपर्क अभियान की शुरुआत हो गई। मुख्यमंत्री की इस यात्रा का मुख्य कार्यक्रम 9 से 11 सितंबर तक चलेगा, जबकि 12 सितंबर को उनके भारत लौटने का कार्यक्रम है। यात्रा का उद्देश्य संयुक्त अरब अमीरात के साथ ओडिशा के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना तथा निवेश, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और उभरते उद्योगों के क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करना है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ओडिशा का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल यूएई पहुंचा है। इसमें उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाईं, मुख्य सचिव अनु गर्ग तथा उद्योग विभाग और इपिकोल के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। आबू धाबी में प्रतिनिधिमंडल का स्वागत उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव हेमंत शर्मा, यूएई स्थित अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने किया। भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों ने भी ओडिशा के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
आबू धाबी पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने आगामी उच्चस्तरीय कारोबारी और निवेशक बैठकों की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने यूएई के निवेशकों, संस्थानों और उद्योग जगत के प्रमुख लोगों के साथ होने वाली बैठकों की व्यवस्थाओं की जानकारी ली और अधिकारियों को सभी संवादों को केंद्रित तथा परिणामोन्मुख बनाने पर जोर दिया।
भारत के राजदूत से भी मुलाकात की
मुख्यमंत्री ने इस दौरान संयुक्त अरब अमीरात में भारत के राजदूत से भी मुलाकात की। दोनों के बीच भारत और यूएई के बीच बढ़ते संबंधों तथा आर्थिक और जनसंपर्क के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने यूएई और आसपास के क्षेत्र में रहने तथा काम करने वाले ओडिया लोगों को निरंतर सहयोग, सुविधाएं और बेहतर जीवन-परिस्थितियां उपलब्ध कराने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने ओडिया समुदाय को ओडिशा और यूएई के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
निवेश के साथ तकनीक और औद्योगिक साझेदारी पर जोर
आबू धाबी में होने वाले कार्यक्रमों के दौरान ओडिशा का प्रतिनिधिमंडल यूएई के प्रमुख संस्थानों, निवेशकों और कारोबारी समूहों के साथ सीधे संवाद करेगा। सरकार का लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि संभावित निवेश को ठोस परियोजनाओं में बदलने के साथ तकनीकी सहयोग, औद्योगिक साझेदारी और दीर्घकालिक निवेश के अवसर तलाशना है।
मुख्यमंत्री निवेशकों के समक्ष ओडिशा की प्राकृतिक संपदा, विकसित औद्योगिक ढांचे, बंदरगाहों, प्रतिस्पर्धी बिजली उपलब्धता, कुशल मानव संसाधन तथा भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच को प्रमुख ताकत के रूप में प्रस्तुत करेंगे।
ओडिशा का औद्योगिक विकास के नए चरण में प्रवेश
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि ओडिशा औद्योगिक विकास के नए चरण में प्रवेश कर चुका है और यूएई के साथ संबंध इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि ओडिशा केवल निवेश का आमंत्रण देने के लिए नहीं, बल्कि विश्वास, तकनीक, मूल्य सृजन और रोजगार पर आधारित दीर्घकालिक साझेदारी बनाने के उद्देश्य से यूएई आया है।
उन्होंने कहा कि यूएई एक महत्वपूर्ण वैश्विक आर्थिक साझेदार है और ओडिशा सरकार ठोस निवेश तथा औद्योगिक अवसरों के माध्यम से दोनों पक्षों के संबंधों को और मजबूत करना चाहती है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का मुख्य जोर निवेश में रुचि को जमीन पर उतरने वाली परियोजनाओं में बदलने, रोजगार पैदा करने और ओडिशा को वैश्विक कारोबार के लिए प्रतिस्पर्धी निवेश केंद्र के रूप में मजबूत करने पर है।
प्रमुख निवेशकों से होगी मुलाकात
ओडिशा के यूएई निवेश अभियान का पहला पूर्ण दिन 9 सितंबर को आबू धाबी में उच्चस्तरीय बैठकों के साथ शुरू होगा। कार्यक्रम में इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (आईएचसी) और उसके कारोबारी समूहों, इंडियन बिजनेस एंड प्रोफेशनल ग्रुप (आईबीपीजी), यूएई के निवेश मंत्री तथा वरिष्ठ निवेश हितधारकों के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं।
पेट्रोकेमिकल और रसायन क्षेत्र पर केंद्रित विशेष बैठक होगी
इसके बाद पेट्रोकेमिकल और रसायन क्षेत्र पर केंद्रित विशेष बैठक होगी। इन बैठकों में संभावित निवेश, औद्योगिक साझेदारी, तकनीकी सहयोग और ओडिशा-यूएई आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की जाएगी।
ओडिशा सरकार के लिए यह अभियान राज्य के औद्योगिक परिवर्तन के महत्वपूर्ण दौर में हो रहा है। सरकार का लक्ष्य यूएई तक सीमित रहने के बजाय व्यापक मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र के साथ दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी विकसित करना है। निवेश, तकनीक, व्यापार और औद्योगिक सहयोग के माध्यम से नए अवसर तलाशते हुए सरकार निवेशकों की रुचि को ठोस परियोजनाओं, रोजगार और दीर्घकालिक आर्थिक मूल्य में बदलने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
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