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सरकारी भवनों के साथ निजी इमारतों पर भी कार्रवाई, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों को नोटिस
भुवनेश्वर। दिल्ली के सत्य निकेतन में हाल ही में हुई इमारत दुर्घटना में सात लोगों की मौत के बाद ओडिशा सरकार ने शहरी क्षेत्रों में जर्जर और असुरक्षित भवनों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार ने ऐसे भवनों की पहचान कर उनकी संरचनात्मक स्थिति की जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
आवास एवं शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्र ने कहा कि शहरों में स्थित कमजोर और जर्जर सरकारी भवनों की पहचान कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से ध्वस्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संरचनात्मक रूप से असुरक्षित पाए जाने वाले निजी भवनों के मालिकों को भी नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मीडियाकर्मियों से बातचीत में मंत्री ने बताया कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जर्जर स्कूल भवनों और आंगनबाड़ी केंद्रों की पहचान की गई है। इनमें से कई भवनों को ध्वस्त करने के लिए पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं। सरकार का उद्देश्य किसी भी संभावित दुर्घटना से पहले ऐसे भवनों को हटाना है।
शहरी सीमाओं में असुरक्षित भवनों पर नजर
महापात्र ने कहा कि शहरी सीमा के भीतर स्थित ऐसे सभी भवनों पर संबंधित अधिकारियों को विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, जो लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। भवनों की संरचनात्मक स्थिति का आकलन करने के बाद जरूरत के अनुसार मरम्मत, खाली कराने या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि हम इस मामले पर कड़ी नजर रख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कमजोर और जर्जर भवनों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार आवश्यक कदम उठाएगी। सरकारी और निजी दोनों तरह की इमारतों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय निकायों और संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार की इस कार्रवाई का उद्देश्य पुराने और कमजोर भवनों से होने वाले जान-माल के नुकसान की आशंका को कम करना है। खासकर स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
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