Home / Odisha / कटक चातुर्मास के अंतर्गत मुनिश्री के सान्निध्य में द्वितीय मासखमण का हुआ प्रत्याख्यान

कटक चातुर्मास के अंतर्गत मुनिश्री के सान्निध्य में द्वितीय मासखमण का हुआ प्रत्याख्यान

कटक : मानव जीवन की सार्थकता आत्मोन्नति और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने में है। इस मार्ग पर तपस्या साधना का महत्वपूर्ण माध्यम है। तप से व्यक्ति बाहरी आकर्षणों से ऊपर उठकर अपनी अंतःशक्ति को पहचानता है और आत्मशुद्धि की ओर अग्रसर होता है। जैन दर्शन में तप के बारह प्रकार बताए गए हैं, जिनके माध्यम से त्याग, संयम और साधना की भावना को विकसित किया जाता है।
इसी आध्यात्मिक साधना की प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत करते हुए श्रीमती कुसुम कोठारी ने कटक में मुनि मोहजीत कुमार जी के सान्निध्य में 30 दिवसीय मासखमण तप का प्रत्याख्यान किया।कटक चातुर्मास के अंतर्गत मुनिश्री के सान्निध्य में यह द्वितीय मासखमण का तप हुआ। उनके तप की अनुमोदना में आयोजित प्रत्याख्यान समारोह में संबोधित करते हुए मुनिश्री मोहजीत कुमार जी ने कहा कि तप आत्मशुद्धि के साथ-साथ संघ की प्रभावना और वृद्धि का भी महत्वपूर्ण आधार है। मोक्ष की ओर ले जाने वाले मार्ग में तप का विशेष स्थान है। तपस्वी का उद्देश्य कर्मों की निर्जरा करते हुए आत्मा को अधिक निर्मल बनाना है। तप शरीर, मन और भावों को अनुशासित करने तथा आंतरिक शुद्धि का सशक्त माध्यम है।
मुनि श्री ने कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में तपस्या को सदैव विशेष महत्व मिला है। जैन धर्म में तप की साधना अपनी विशिष्ट पहचान रखती है, जिसमें त्याग, संयम तथा कई अवसरों पर निराहार एवं निर्जल साधना का भी समावेश होता है। तप व्यक्ति के भीतर धैर्य, आत्मविश्वास और संकल्प की शक्ति को विकसित करता है।
मुनि भव्यकुमार जी ने तप की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तप उच्च मनोबल और आत्मसाधना की दिशा में बढ़ने का प्रथम सोपान है। निरंतर साधना के द्वारा व्यक्ति अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण प्राप्त करता है और आत्मिक विकास की ओर कदम बढ़ाता है।
वहीं मुनि जयेश कुमार जी ने तपस्या के अनुभवों को रेखांकित करते हुए कहा कि दीर्घकालीन तप के दौरान साधक को अनेक प्रकार के अनुभवों और उतार-चढ़ावों से गुजरना पड़ता है। आहार की स्थिति में व्यक्ति को मुख्यतः बाहरी ऊर्जा का अनुभव होता है, जबकि निराहार साधना के दौरान उसकी अंतर्निहित शक्ति और आत्मबल का अनुभव अधिक स्पष्ट रूप से सामने आता है। उन्होंने तपस्या को आत्मशक्ति को जागृत और अनुशासित करने का प्रभावी माध्यम बताया।
समारोह में तेरापंथ महिला मंडल, कटक एवं तपस्वी के पारिवारिकजनों द्वारा अनुमोदना गीत प्रस्तुत किए गए।
इस अवसर पर तेरापंथी सभा अध्यक्ष मुकेश सेठिया सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्या के प्रति अपनी अनुमोदना प्रकट करते हुए तपस्वी बहन के उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की।

Share this news

About desk

Check Also

IAT NEWS INDO ASIAN TIMES ओडिशा की खबर, भुवनेश्वर की खबर, कटक की खबर, आज की ताजा खबर, भारत की ताजा खबर, ब्रेकिंग न्यूज, इंडिया की ताजा खबर

जाजपुर में देह व्यापार गिरोह का भंडाफोड़

    दो महिलाओं समेत पांच हिरासत में     मुख्य डाकघर के पास मकान …