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नए कानून से ओडिशा के आर्थिक अधिकारों और राजस्व हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका
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संगठन ने इसलिए इस कानून को वापस लेने की मांग की
भुवनेश्वर। संसद में हाल ही में पारित एमएमडीआर कानून, 2026 को राज्य हित के खिलाफ बताते हुए ओडिशा जन कांग्रेस (ओजेसी) ने इसके विरोध में 8 सितंबर को जाजपुर जिले के चंडीखोल में विशाल विरोध प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी करने का निर्णय लिया है।
रविवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में ओजेसी की मीडिया सेल के अध्यक्ष प्रशांत शतपथी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नए कानून से ओडिशा के आर्थिक अधिकारों और राजस्व हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। संगठन ने इसलिए इस कानून को वापस लेने की मांग की है।
शतपथी के अनुसार, नए कानून में जोड़ी गई धारा 9-डी से ओडिशा के पुराने बकाये की वसूली का राज्य का अधिकार प्रभावित होगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य का यह बकाया एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि खनिज संसाधनों पर कर, सेस और रॉयल्टी आदि वसूलने के राज्य के अधिकारों को भी सीमित किया गया है।
उन्होंने कहा कि 2024 में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद राज्यों को खनिज संसाधनों पर स्वतंत्र रूप से कर लगाने का अधिकार मिला था। साथ ही पुराने बकाये की राशि को 1 अप्रैल 2026 से 12 वर्षों के भीतर किस्तों में वसूलने की व्यवस्था की गई थी। ओजेस़ी का आरोप है कि नए कानून से इन अधिकारों पर असर पड़ा है।
प्रशांत शतपथी ने आरोप लगाया कि यह कानून राज्य के पुराने बकाया करों की वसूली, नए कर लगाने तथा अपने खनिज संसाधनों के संबंध में स्वतंत्र निर्णय लेने जैसे आर्थिक अधिकारों को सीमित करता है।
इस मुद्दे पर ओजेस़ी ने ओडिशा के 20 भाजपा सांसदों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। संगठन ने आरोप लगाया कि लोकसभा में राज्य के हितों को प्रभावित करने वाले इस कानून के खिलाफ भाजपा सांसदों ने आवाज नहीं उठाई। ओजेस़ी ने भाजपा द्वारा इस मुद्दे पर विरोध नहीं किए जाने की भी आलोचना की।
संगठन ने 2004 के भाजपा-बीजद गठबंधन सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय के विधायकों ने ओरीसेड कानून का समर्थन किया था। ओजेस़ी ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और अन्य भाजपा नेताओं के वर्तमान रुख पर सवाल उठाया।
ओजेसी ने यह भी दावा किया कि उस समय तत्कालीन विधायक और वर्तमान राष्ट्रपति ने भी ओडिशा के खनिज संसाधनों पर कर लगाने के राज्य के अधिकार का समर्थन किया था। संगठन ने राज्य के हित से जुड़े इस मुद्दे पर वर्तमान में उनकी चुप्पी पर सवाल उठाया।
ओजेसी ने राज्य हितों की रक्षा की मांग को लेकर 8 सितंबर को चंडीखोल में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी में लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया है।
संवाददाता सम्मेलन में ओजेसी के उपाध्यक्ष निकुंज पाशायत, नजीबुर रहमान खान, ओजेसी सेवा संगठन के अध्यक्ष मनोज जेना और किसान मोर्चा के अध्यक्ष संग्राम माझी उपस्थित थे।
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