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ओडिशा में बिना बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों का कट रहा ई-चालान
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1 सितंबर से लागू हुई नई व्यवस्था, मोबाइल पर भेजा जाएगा चालान
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए राज्य में ई-डिटेक्शन व्यवस्था लागू कर दी है। अब बिना वैध बीमा और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) के सड़कों पर चलने वाले वाहनों की इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पहचान कर उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ई-चालान भेजा जाएगा।
परिवहन आयुक्त-सह-राज्य परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य के विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर ई-डिटेक्शन प्रणाली स्थापित की गई है। इसके माध्यम से बिना वैध दस्तावेजों के चल रहे वाहनों की पहचान की जाएगी।
1 सितंबर से शुरू हुई कार्रवाई
राज्य में ई-डिटेक्शन प्रणाली के माध्यम से प्रवर्तन कार्रवाई 1 सितंबर 2026 से शुरू हो गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक सड़कों पर चलने वाले सभी मोटर वाहनों के पास मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत आवश्यक वैध दस्तावेज होना अनिवार्य है। इनमें विशेष रूप से प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र और वैध वाहन बीमा शामिल हैं।
कैमरे और तकनीक से होगी वाहनों की पहचान
ई-डिटेक्शन प्रणाली के माध्यम से ऐसे वाहनों की इलेक्ट्रॉनिक पहचान की जाएगी, जिनके पास वैध पीयूसीसी या बीमा नहीं है। उल्लंघन सामने आने के बाद मोटर वाहन अधिनियम और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया के अनुसार ई-चालान तैयार किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित इस व्यवस्था से सड़क पर वाहनों की जांच और नियमों के पालन की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
वाहन मालिक पहले जांच लें बीमा और पीयूसीसी की वैधता
राज्य परिवहन प्राधिकरण ने वाहन मालिकों और चालकों से अपील की है कि वे सार्वजनिक सड़क पर वाहन चलाने से पहले अपने बीमा और पीयूसीसी की वैधता की जांच कर लें। यदि इनमें से किसी दस्तावेज की अवधि समाप्त हो गई है तो समय रहते उसका नवीनीकरण करा लेना चाहिए।
लंबित चालान पर वाहन हो सकता है ‘लेन-देन के लिए प्रतिबंधित’
अधिसूचना में केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत निर्धारित अवधि से अधिक समय तक लंबित रहने वाले चालानों वाले वाहनों को संबंधित पोर्टल पर ‘लेन-देन नहीं किया जा सकता’ के रूप में चिह्नित किया जा सकता है।
इसका मतलब है कि वाहन से जुड़े निर्धारित लेन-देन पर रोक लग सकती है। इसलिए वाहन मालिकों को सलाह दी गई है कि वे लंबित ई-चालान का निर्धारित समय के भीतर निपटारा करें।
पीयूसी जांच प्रणाली में भी दिखेगा लंबित चालान
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 167 के उद्देश्य से पीयूसी जांच भी एक लेन-देन मानी जाती है। इसलिए निर्धारित लंबित चालान और ‘लेन-देन नहीं किया जा सकता’ की जांच वाहन आधारित पीयूसी जांच प्रणाली में भी लागू होगी।
इस व्यवस्था के कारण जिन वाहन मालिकों के ई-चालान लंबित हैं, उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर चालान का निपटारा करने की सलाह दी गई है।
सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
सरकार ने कहा है कि ई-डिटेक्शन व्यवस्था को तकनीक आधारित कानूनी प्रवर्तन के तहत लागू किया गया है। इसका उद्देश्य यातायात अनुशासन, पर्यावरण नियमों का पालन, तीसरे पक्ष के हितों की सुरक्षा और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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