-
बोले- एसआईआर से 14-15 करोड़ लोगों को सूची से हटा दिया
-
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने एसआईआर की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
-
कहा- अवैध प्रवासियों की संख्या सार्वजनिक करे चुनाव आयोग
भुवनेश्वर। देश के कई राज्यों में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने रविवार को चुनाव आयोग पर तीखा तंज कसा। उन्होंने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के जरिए भारत की करीब 14 से 15 करोड़ आबादी को मानो समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने चुनाव आयोग से यह भी पूछा कि इस पूरी कवायद में कितने अवैध प्रवासियों की पहचान की गई, क्योंकि यही इसका प्रमुख उद्देश्य बताया गया था।
कुरैशी ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि वह चुनाव आयोग को एक कठिन अभियान पूरा करने के लिए बधाई देना चाहते हैं, जिसके माध्यम से करीब 14-15 करोड़ लोगों को सूची से बाहर कर दिया गया। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि आयोग ने कितने अवैध प्रवासियों की पहचान की है और अफसोस है कि यह आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अवैध प्रवासियों की संख्या बताने की मांग
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग से एसआईआर के दौरान मिले अवैध प्रवासियों की संख्या सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि इससे देश को आयोग की बड़ी सफलता का पता चलेगा और यह भी सामने आएगा कि उसने ऐसा काम कर दिखाया, जिसे राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग भी नहीं कर सका।
उन्होंने कहा कि करीब 15 प्रतिशत आबादी को हटाने के कारण आयोग ने जनसंख्या नियंत्रण में भी बड़ा योगदान दिया है।
कुरैशी पहले भी उठा चुके हैं एसआईआर पर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब एसवाई कुरैशी ने एसआईआर प्रक्रिया की आलोचना की है। इससे पहले भी उन्होंने इसे ‘सद्भावनापूर्ण उद्देश्य से प्रेरित नहीं’ बताते हुए कहा था कि मतदान नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, चुनाव आयोग की ओर से दी जाने वाली कोई कृपा नहीं।
उन्होंने कहा था कि एसआईआर के जरिए करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाना लोकतंत्र के साथ छेड़छाड़ है। उनका कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत पात्र नागरिकों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग ने बताई एसआईआर की वजह
चुनाव आयोग के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूचियों को सटीक, अद्यतन और अपात्र या दोहरे नामों से मुक्त करना है। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई पात्र मतदाता मताधिकार से वंचित न रह जाए।
विशेष गहन पुनरीक्षण की राष्ट्रव्यापी घोषणा अक्टूबर 2025 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने की थी। आयोग ने मतदाताओं के एक से अधिक स्थानों पर पंजीकरण, मृत्यु के बाद नाम नहीं हटाए जाने, प्रवासन तथा विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने जैसी परिस्थितियों को इसके प्रमुख कारणों में बताया था।
महाराष्ट्र में दो करोड़ कम मतदाताओं को लेकर विवाद
एसआईआर को लेकर महाराष्ट्र में भी राजनीतिक विवाद तेज हुआ है। महाराष्ट्र की विशेष गहन पुनरीक्षण की मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद पिछली मतदाता सूची की तुलना में करीब दो करोड़ कम मतदाता दर्ज होने का मुद्दा सामने आया।
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 9,78,54,049 मतदाता थे। इनमें से 17 अगस्त तक एसआईआर के गणना चरण में 7,71,65,562 मतदाताओं ने अपने फॉर्म जमा किए थे।
विपक्ष ने भी चुनाव आयोग और भाजपा पर साधा निशाना
एसआईआर को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने महाराष्ट्र की मतदाता सूची से कथित तौर पर दो करोड़ नाम हटाए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में वास्तविक समय में मतों की चोरी की जा रही है।
एसआईआर अब सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव का प्रमुख मुद्दा बन गया है। खासकर उन राज्यों में इसका विरोध अधिक तेज है, जहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। आयोग जहां इसे मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाने की प्रक्रिया बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाताओं के अधिकारों से जोड़कर लगातार सवाल उठा रहा है।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
