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नवीन ने भाजपा सांसदों से एएमडीआर संशोधन का विरोध करने को कहा

  •     13 अगस्त को ‘काला दिवस’ बताया

  •     खनिज संसाधनों से जुड़े संशोधन का विरोध करने का आह्वान

भुवनेश्वर। ओडिशा के नेता प्रतिपक्ष और बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष नवीन पटनायक ने राज्य के सभी भाजपा सांसदों से माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर अपने रुख पर पुनर्विचार करने और संशोधन को वापस लेने की मांग उठाने की अपील की है।

शनिवार को ओडिशा के भाजपा सांसदों को लिखे पत्र में पटनायक ने 13 अगस्त को लोकसभा में विधेयक पारित होने के दिन को “ओडिशा के लिए काला दिवस” करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा सांसदों के समर्थन से यह विधेयक लोकसभा में पारित हुआ, जबकि इसके प्रावधानों का राज्य और यहां के लोगों पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

लोगों के हितों की आवाज बनें

पटनायक ने कहा कि संसद भारतीय लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है और संसद सदस्य होने के नाते ओडिशा के सांसदों की जिम्मेदारी है कि वे राज्य के लोगों के हितों की आवाज बनें। उन्होंने भाजपा सांसदों द्वारा विधेयक के पक्ष में मतदान किए जाने पर चिंता जताते हुए कहा कि जनता ने उन पर भरोसा करके उन्हें संसद भेजा है।

विधेयक पारित होने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया

बीजद अध्यक्ष ने विधेयक के लोकसभा में पारित होने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि दूरगामी प्रभाव वाले प्रावधानों के बावजूद विधेयक पर लोकसभा में 10 मिनट से भी कम समय तक चर्चा हुई।

पटनायक ने कहा कि इस कानून से ओडिशा सबसे अधिक प्रभावित होने वाले राज्यों में होगा। उन्होंने कहा कि देश के कुल खनिज भंडार में ओडिशा की हिस्सेदारी करीब 44 प्रतिशत है और राज्य दशकों से देश के इस्पात, बिजली, खनन और बुनियादी ढांचे के विकास में अपने खनिज संसाधनों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है।

वार्षिक नुकसान 12,000 करोड़ से अधिक – पटनायक

उन्होंने दावा किया कि इस संशोधन से ओडिशा को होने वाला अनुमानित वार्षिक नुकसान 12,000 करोड़ से अधिक हो सकता है, जो समय के साथ लाखों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। पटनायक ने यह भी आरोप लगाया कि संशोधन के माध्यम से राज्य के अपने खनिज संसाधनों और खनिज-समृद्ध भूमि पर राज्य सरकार के नियंत्रण को कमजोर किया गया है।

बच्चों और युवाओं के भविष्य पर भी पड़ेगा असर

उन्होंने कहा कि इस कानून का असर ओडिशा के बच्चों और युवाओं के भविष्य पर भी पड़ेगा, जिनका भविष्य राज्य के संसाधनों और उनसे पैदा होने वाले अवसरों से जुड़ा है। साथ ही उन्होंने खनन के कारण प्रदूषण, विस्थापन, पर्यावरणीय क्षरण और अन्य कठिनाइयों का सामना करने वाले लोगों के हितों का भी उल्लेख किया।

भाजपा सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें

पटनायक ने भाजपा सांसदों से अपील की कि वे अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और ओडिशा की भावी पीढ़ियों के हितों पर विचार करें। उन्होंने उनसे एएमडीआर अधिनियम में किए गए ऐसे संशोधन को चुनौती देने और उसे वापस लेने की मांग उठाने का आग्रह किया, जिससे उनके अनुसार राज्य सरकार की शक्तियां प्रभावित होती हैं।

उन्होंने कहा कि इतिहास उन लोगों को याद रखता है और सम्मान देता है जो अपने लोगों और उनके संसाधनों के साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं। पटनायक ने भाजपा सांसदों से कहा कि यह उनके लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है, जहां उन्हें यह तय करना है कि वे उस राज्य और जनता के हितों के लिए खड़े होंगे या नहीं, जिसने उन्हें लोकसभा में अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा है। पत्र के अंत में पटनायक ने कहा कि मैं यह निर्णय आपके विवेक पर छोड़ता हूं

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