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भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों और वैज्ञानिक नवाचार पर दिया जोर
बालेश्वर, फकीर मोहन विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग की ओर से राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 शैक्षणिक उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान यात्रा, अंतरिक्ष क्षेत्र में हासिल महत्वपूर्ण उपलब्धियों तथा राष्ट्र निर्माण में वैज्ञानिक नवाचार की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लेकर भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों पर विचार-विमर्श किया तथा युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रति प्रेरित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संतोष कुमार त्रिपाठी ने की। उन्होंने अनुसंधान, शिक्षा और सतत विकास को आगे बढ़ाने में अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने तथा वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के बढ़ते नेतृत्व में योगदान देने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता प्रमोद कुमार परिड़ा, ओडिशा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक, ने भारत के विस्तार करते अंतरिक्ष कार्यक्रम पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से अंतरिक्ष अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में उभरते अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम की शुरुआत भौतिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजीव बिस्वाल द्वारा अतिथियों के परिचय से हुई। इसके बाद राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई, जिसमें भारत की अंतरिक्ष यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को दर्शाया गया।
स्नातकोत्तर परिषद के अध्यक्ष प्रो. संतोष कुमार अग्रवाल ने अंतरविषयक अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान अकादमिक उत्कृष्टता और तकनीकी प्रगति के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहा है।
कार्यक्रम के अंत में भौतिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक हिमांशु भूषण नायक ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का समन्वय वायुमंडलीय विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विवेकानंद नायक ने किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उत्साहपूर्वक शामिल हुए। आयोजन ने वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान आधारित शिक्षा तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति विद्यार्थियों की रुचि को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
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