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दो काव्य पुस्तकों का संयुक्त विमोचन

भुवनेश्वर: हिंदी भाषा के दो नामचीन कवि आशीष विद्यार्थी एवं विनोद कुमार की पुस्तक क्रमशः “मैंने देश बदलते देखा है” एवं “जीवन के विविध रंग” का संयुक्त विमोचन ओड़िशा के साहित्यिक गतिविधियों के केंद्र अनुज हिंदी पुस्तकालय में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पुस्तकालय के मुख्य संरक्षक सुभाष चन्द्र भुरा तथा सम्मानित अतिथि के रूप में अशोक पाण्डेय, किशन खण्डेलवाल, रामकिशोर शर्मा, तथा मोरालीलाल लढानिया आदि मंचासीन थे।
मैंने देश बदलते देखा है पुस्तक की समीक्षा जहां मनीष कुमार पाण्डेय ने बहुत ही सुन्दर तरीके से किया वहीं जीवन के विविध रंग का समीक्षा भावपूर्ण तरीके से विक्रमादित्य सिंह ने किया जबकि काव्य संग्रह की अनुभूति किशन खण्डेलवाल तथा रामकिशोर शर्मा ने व्यक्त की।
मुख्य अतिथि सुभाष चन्द्र भूरा ने अपने संबोधन में बताया कि अबतक पुस्तकालय में कुल 25 पुस्तकों का लोकार्पण हो चुका है। आज का दिन पुस्तकालय के लिए स्वर्णिम अक्षरों में अंकित होने का दिन है क्योंकि दोनों ही कवि बिहार के हैं और दोनों ने ही पुस्तकालय की श्रीवृद्धि में अपनी-अपनी कविताओं के नियमित पाठन से समय-समय पर किया है। अशोक पाण्डेय ने बताया कि बिहार का जमालपुर तथा लखिसराय दो संस्कृतियों ने आज क्रमशः मैंने देश को बदलते देखा है तथा जीवन के विविध रंग प्रकाशित कर यह सिद्ध कर दिया कि भारत, भारतीयता तथा भारतीय संस्कृति ऐसे ही युवा कवियों के हाथों में उनकी रचनात्मक काव्य संग्रहों के सृजन के माध्यम से सुरक्षित है।

मैंने देश बदलते देखा है’ इस काव्य संग्रह में आशीष विद्यार्थी ने मजबूत होते भारतवर्ष को दिखाया है। लेखक ने अपने जीवन काल में हुए अमूल चूल परिवर्तन को कविता के माध्यम से रखा है।इसके साथ-साथ इसमें अन्य बहुत सारी कविताएं हैं जो अपने अंदर व्यंग, प्रेम, शिक्षा, ज्ञान, वीरता, जागरूकता, महापुरुषों की जीवन गाथा, नारी शक्ति, इसरो, देश प्रेम आदि सभी प्रकार के विषयों को समेटे हुए है।
“जीवन के विविध रंग ” काव्य संग्रह एक ओर जहां मां शारदे के वंदन से शुरू होकर राष्ट्र प्रेम, राष्ट्र चिंतन होते हुए हर रंग हिन्दुस्तानी को स्वीकार कर लहर लहर लहराता तिरंगा को नमन करता है वहीं दूसरी ओर गांव एवं बचपन की यादें, माता-पिता में ही भगवान है का भाव समेटे, पिता-पुत्री का वास्तल्य प्रेम और कोख में मरती बेटियों के चित्कार को समाज के समाने आईने की तरह रखता है।
इस अवसर पर राजेश तिवारी, येलीना पंडा, हरिराम पंसारी, अमित रंजन, स्मिता कानूनगो, रश्मि गुप्ता, मंजुला अस्थाना, सालिन अग्रवाल, रेखा, निरू कुमारी, प्रीति कुमारी आदि उपस्थित थे और उपस्थित लोगों ने दो नवोदित कवियों को उनकी पुस्तक के लिए शुभकामनाएं प्रेषित किया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन श्री राम किशोर शर्मा ने दिया।

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