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मिशन शक्ति ने सीआरआईएसपी और एनएसई फाउंडेशन के साथ किया समझौता
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आठ जिलों के 69 प्रखंड होंगे शामिल
भुवनेश्वर। ओडिशा में ग्रामीण परिवारों के बीच रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने तथा मजबूरी में होने वाले पलायन को रोकने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। मिशन शक्ति विभाग ने गुरुवार को प्रोजेक्ट ब्लेस के क्रियान्वयन के लिए सेंटर फॉर रिसर्च इन स्कीम्स एंड पॉलिसीज (सीआरआईएसपी) और एनएसई फाउंडेशन के साथ त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया। तीन वर्ष की इस परियोजना का उद्देश्य कमजोर और पलायन के प्रति संवेदनशील ग्रामीण परिवारों को उनके गांव में ही स्थायी आजीविका, कौशल विकास और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना है।
समझौते पर लोक सेवा भवन में मुख्य सचिव अनु गर्ग और मिशन शक्ति सचिव मानसी निंभाल की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। परियोजना का क्रियान्वयन ओडिशा आजीविका मिशन के सहयोग से किया जाएगा।
पलायन से पहले परिवारों की पहचान
प्रोजेक्ट ब्लेस के तहत ऐसे परिवारों की पहचान की जाएगी, जिनके आर्थिक और सामाजिक हालात उन्हें मजबूरी में गांव छोड़कर दूसरे राज्यों या शहरों में काम करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इन परिवारों की पहचान पलायन शुरू होने से पहले की जाएगी और उनकी जरूरत के अनुसार आजीविका से जोड़ा जाएगा।
परिवारों को रोजगार के अवसरों के अलावा कौशल विकास प्रशिक्षण, वित्तीय सेवाओं, ऋण सुविधा और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक टिकाऊ आय के साधन विकसित करना है, ताकि आर्थिक मजबूरी के कारण होने वाले पलायन को कम किया जा सके।
आठ जिलों के 69 प्रखंडों में होगा क्रियान्वयन
यह परियोजना ओडिशा के आठ जिलों के 69 प्रखंडों में लागू की जाएगी। इनमें बलांगीर, बरगढ़, कालाहांडी, गजपति, कंधमाल, कोरापुट, नवरंगपुर और रायगड़ा शामिल हैं।
परियोजना से लगभग 8.81 लाख ग्रामीण परिवारों और 86,468 स्वयं सहायता समूहों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं और कमजोर परिवारों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
550 जीविका सखियां निभाएंगी अहम भूमिका
परियोजना को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए स्वयं सहायता समूहों से चयनित लगभग 550 जीविका सखियों को जिम्मेदारी दी जाएगी। ये कार्यकर्ता ग्रामीण परिवारों की पहचान, उनकी जरूरतों का आकलन और उपलब्ध योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
कार्यक्रम को स्वयं सहायता समूहों, क्लस्टर स्तरीय महासंघों तथा ग्राम पंचायत स्तरीय महासंघों के माध्यम से लागू किया जाएगा। इससे स्थानीय सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका और क्षमता भी मजबूत होगी।
मोबाइल ऐप से होगा परिवारों की जरूरतों का आकलन
प्रोजेक्ट ब्लेस के तहत परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का आकलन करने के लिए मोबाइल ऐप आधारित संवेदनशीलता आकलन किया जाएगा। इसके माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि किस परिवार को किस प्रकार की सहायता की आवश्यकता है।
आकलन के आधार पर प्रत्येक परिवार के लिए अलग-अलग आजीविका योजना तैयार की जाएगी। बाजार की मांग के अनुसार कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा और ग्रामीण उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल बाजार मंच विकसित किए जाएंगे।
जरूरत के अनुसार रोजगार और ऋण से जोड़ा जाएगा
परियोजना में परिवारों को उनकी क्षमता और जरूरत के अनुसार विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। उन्हें कौशल प्रशिक्षण, ऋण सुविधा, वित्तीय सेवाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर जोर दिया जाएगा।
इससे ग्रामीण परिवारों को केवल तत्काल रोजगार देने के बजाय उनकी आय को लंबे समय तक स्थिर और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जाएगा।
मजबूरी में पलायन करने वालों को भी मिलेगा सहयोग
यदि किसी परिवार के सदस्य के लिए पलायन करना अपरिहार्य हो जाता है, तो परियोजना के तहत प्रवासी श्रमिकों को उनके कार्यस्थल पर सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसमें उचित मजदूरी, कानूनी सहायता और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास होगा।
प्रवासी परिवारों के बच्चों के लिए पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा जैसी आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
महिला आर्थिक सशक्तीकरण पर विशेष जोर
प्रोजेक्ट ब्लेस के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों और उनके महासंघों को और मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय भागीदारी का अवसर देना और उनकी आय तथा निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाना है।
समझौता कार्यक्रम के दौरान एनएसई की प्रतिनिधि रमा मोहन तथा सीआरआईएसपी के प्रतिनिधि आर. सुब्रमण्यम और जी.वी.जी. शर्मा सहित अन्य प्रतिनिधि आभासी माध्यम से शामिल हुए। मिशन शक्ति विभाग के अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
तीन वर्ष की यह पहल ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के स्थायी अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ मजबूरी में होने वाले पलायन के मूल कारणों को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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