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20.75 लाख किसानों का पंजीकरण
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44.38 लाख किसानों को डिजिटल पहचान देने का लक्ष्य
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16 अगस्त से खरीफ फसल का डिजिटल सर्वेक्षण शुरू
भुवनेश्वर। ओडिशा में कृषि क्षेत्र को डिजिटल बनाने और किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए एग्रीस्टैक अभियान तेज कर दिया गया है। लोक सेवा भवन में मुख्य सचिव अनु गर्ग की अध्यक्षता में एग्रीस्टैक-ओडिशा की राज्य स्तरीय संचालन समिति की आठवीं बैठक हुई। बैठक में किसान पंजीकरण, डिजिटल फसल सर्वेक्षण और एग्रीस्टैक के लिए राज्य स्तरीय संस्थागत व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए।
एग्रीस्टैक केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त डिजिटल पहल है। इसका उद्देश्य प्रत्येक किसान को एक विशिष्ट किसान पहचान संख्या उपलब्ध कराना है, जिसके माध्यम से सरकारी योजनाओं, फसल सलाह, फसल बीमा, संस्थागत ऋण, कृषि इनपुट पर मिलने वाली सहायता और अन्य सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी।
कृषि एवं किसान सशक्तीकरण विभाग के आयुक्त-सह-सचिव सचिन रामचंद्र जाधव ने बैठक में एग्रीस्टैक की प्रगति की जानकारी दी। राज्य के सभी 30 जिलों में कुल 44,38,559 किसानों को पंजीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से अब तक 20,75,683 किसानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है।
झारसुगुड़ा जिला किसान पंजीकरण में सबसे आगे
झारसुगुड़ा जिला किसान पंजीकरण में सबसे आगे है, जहां 75.78 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच करीब सात लाख किसानों का पंजीकरण किया गया। मई महीने में सबसे अधिक 2,29,700 किसानों का पंजीकरण हुआ।
16 अगस्त से शुरू होगा खरीफ फसल का डिजिटल सर्वेक्षण
बैठक में रबी 2025 के डिजिटल फसल सर्वेक्षण की भी समीक्षा की गई। इस दौरान 53,78,625 हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 19,91,110 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की पहचान की गई। यह सर्वेक्षण किए गए कुल क्षेत्र का लगभग 37 प्रतिशत है।
खरीफ 2026 के लिए डिजिटल फसल सर्वेक्षण 16 अगस्त से शुरू होगा। इसके लिए प्रखंड और जिला स्तर पर क्षेत्रीय कर्मचारियों का प्रशिक्षण 5 से 17 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है। सर्वेक्षण को पूरा करने में लगभग 45 दिन से दो महीने तक का समय लग सकता है।
फसल की सही पहचान के लिए बुवाई के लगभग एक महीने बाद और कटाई से कम से कम 15 दिन पहले आंकड़े एकत्र किए जाएंगे।
जीपीएस की सटीकता पर विशेष जोर
इस बार डिजिटल सर्वेक्षण में जीपीएस की सटीकता को और मजबूत किया गया है। सर्वेक्षण करने वाले कर्मचारियों को संबंधित भूखंड की सीमा से 10 मीटर के भीतर रहकर सर्वेक्षण करना होगा। रबी सर्वेक्षण के दौरान यह सीमा 20 मीटर थी।
डिजिटल फसल सर्वेक्षण के मोबाइल अनुप्रयोग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुविधाओं को भी और मजबूत किया जाएगा। इससे धान और गैर-धान फसलों की वास्तविक समय में पहचान और सत्यापन में मदद मिलेगी।
सर्वेक्षण की निगरानी के लिए प्रत्येक सप्ताह प्रखंड स्तर पर और प्रत्येक पखवाड़े जिला स्तर पर समीक्षा बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया गया है।
वास्तविक किसानों की पहचान के लिए बनेगी स्पष्ट कार्यप्रणाली
मुख्य सचिव अनु गर्ग ने संबंधित विभागों को एग्रीस्टैक से जुड़े सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने आंकड़ों की गुणवत्ता और प्रमाणिकता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने राजस्व, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण तथा कृषि विभागों को मिलकर एक स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने की सलाह दी, ताकि वास्तविक किसानों, बटाईदारों और अन्य खेती करने वाले लोगों की सही पहचान हो सके। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र किसान किसी भी सरकारी योजना या लाभ से वंचित न रहें।
कृषि योजनाओं और बीमा के लिए बनेगा विश्वसनीय आंकड़ा आधार
मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल फसल सर्वेक्षण से तैयार होने वाला प्रमाणिक आंकड़ा फसल बीमा, कृषि योजनाओं, उत्पादन के अनुमान और भविष्य की कृषि नीतियां तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगा।
उन्होंने सर्वेक्षण में पूर्ण पारदर्शिता, समयबद्धता और उच्च गुणवत्ता बनाए रखने का निर्देश दिया। एग्रीस्टैक से किसानों की डिजिटल पहचान और खेती से जुड़े प्रमाणिक आंकड़े उपलब्ध होने पर सरकारी सहायता को सही लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
राज्य में एग्रीस्टैक आयुक्तालय का प्रस्ताव
बैठक में केंद्र सरकार की ओर से एग्रीस्टैक आयुक्तालय स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। ओडिशा में निदेशक स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में राज्य स्तरीय व्यवस्था बनाने पर विचार किया जा रहा है।
इस व्यवस्था में राजस्व, कृषि तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया जा सकता है। जिलों और प्रखंडों में क्रमश: जिलाधिकारियों और तहसीलदारों के नेतृत्व में समितियां काम करेंगी। राज्य स्तर पर परियोजना प्रबंधन इकाई भी बनाई जा सकती है।
बैठक में अधिकारियों ने विश्वास जताया कि एग्रीस्टैक तकनीक के माध्यम से किसानों को सरकारी सेवाएं अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तेजी से उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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