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सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए अत्याधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल
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संबलपुर के बाद बालेश्वर और भुवनेश्वर में जल्द चालू होंगे डॉप्लर रडार
भुवनेश्वर। बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के बीच ओडिशा सरकार ने राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने तथा मौसम पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी की अध्यक्षता में लोक सेवा भवन में ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में हालिया बाढ़ की स्थिति, नुकसान के आकलन और भविष्य में बाढ़ तथा चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की गई।
72 घंटे में नुकसान का आकलन
मंत्री ने अधिकारियों को आपदा के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ का पानी उतरने के 72 घंटे के भीतर नुकसान का आकलन करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिलों से लगातार रिपोर्ट प्राप्त की जा रही है।
बाढ़ प्रभावित 22 जिलों के लिए 110 करोड़ जारी
बाढ़ प्रभावित 22 जिलों के लिए सरकार ने अब तक 110 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है। इसमें बालेश्वर को 22.03 करोड़, जाजपुर को 20.20 करोड़, भद्रक को 20.12 करोड़, जगतसिंहपुर को 8.18 करोड़, क्योंझर को 6.11 करोड़, संबलपुर को 5.56 करोड़, केंद्रापड़ा को 5.04 करोड़ और मयूरभंज को 5.02 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
जुलाई में सामान्य से 97 प्रतिशत तक अधिक वर्षा
मंत्री ने बताया कि इस वर्ष जुलाई में ओडिशा में पिछले वर्ष जुलाई की तुलना में 65 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। कुछ क्षेत्रों में सामान्य से 97 प्रतिशत तक अधिक बारिश दर्ज की गई। कई नदियों में बाढ़ का पानी घट रहा है, लेकिन अनेक स्थानों पर जलस्तर अभी भी ऊंचा बना हुआ है। प्रभावित जिलों में बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का आकलन जारी है। सभी जिलों को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
बांध और नदी प्रबंधन पर विशेष ध्यान
आगामी समीक्षा में बाढ़ नियंत्रण के दीर्घकालिक उपायों पर चर्चा होगी। इसमें तटबंधों की मरम्मत, टूटे तटबंधों को मजबूत करना, नदियों से गाद निकालना, नदी मार्ग को गहरा करना और जल निकासी व्यवस्था सुधारना शामिल है।
जलाशयों के बेहतर प्रबंधन, जल संरक्षण और विभिन्न नदी प्रणालियों में पानी के नियमन को भी मजबूत किया जाएगा। पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने के साथ कंप्यूटरीकृत निगरानी के माध्यम से जल प्रवाह और जलाशयों के संचालन को अधिक प्रभावी बनाने की योजना है।
122 प्रारंभिक चेतावनी टावर स्थापित
ओडिशा के 573 किलोमीटर लंबे समुद्र तट पर फिलहाल 122 प्रारंभिक चेतावनी टावर स्थापित किए जा चुके हैं। इन टावरों को आधुनिक बनाने के लिए 360 डिग्री निगरानी कैमरे लगाए जाएंगे।
उपग्रह संचार प्रणाली के माध्यम से इन टावरों की क्षमता बढ़ाने और राज्य के सभी 314 प्रखंडों को आधुनिक उच्च गति संचार तकनीक से केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने गोवा और केरल का दौरा कर वहां की आधुनिक प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और आपदा प्रबंधन की बेहतर कार्यप्रणालियों का अध्ययन भी किया है।
पांच डॉप्लर मौसम रडार से बढ़ेगी पूर्वानुमान क्षमता
मंत्री ने बताया कि संबलपुर का डॉप्लर मौसम रडार काम करना शुरू कर चुका है। बालेश्वर और भुवनेश्वर में प्रस्तावित रडार जल्द चालू किए जाएंगे। गोपालपुर और पारादीप में पहले से मौजूद डॉप्लर रडारों की मरम्मत और उन्नयन का काम भी चल रहा है। इसके अलावा पुरी में नया डॉप्लर मौसम रडार स्थापित किया जाएगा।
सभी रडारों के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद ओडिशा में वर्षा, तूफान और अन्य गंभीर मौसम प्रणालियों का पूर्वानुमान अधिक सटीक होने की उम्मीद है। इससे समय रहते चेतावनी जारी करने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद मिलेगी।
आकाशीय बिजली से मौतें रोकने के लिए 35 करोड़
आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों को कम करने के लिए सरकार ने 35 करोड़ रुपये वन विभाग को जारी किए हैं। इस राशि से कृषि क्षेत्रों में ताड़ के पेड़ लगाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे बिजली गिरने से होने वाली जनहानि को कम करने में मदद मिल सकती है।
भुवनेश्वर में जलभराव से निपटने की तैयारी
भारी बारिश के कारण शहरी क्षेत्रों में होने वाले जलभराव की समस्या पर भी बैठक में चर्चा हुई। भुवनेश्वर नगर निगम ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए आईआईटी रुड़की के सहयोग से काम शुरू किया है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
बहुउद्देश्यीय आश्रय केंद्रों का निर्माण तेज होगा
मंत्री ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रस्तावित बहुउद्देश्यीय चक्रवात एवं बाढ़ आश्रय केंद्रों का निर्माण तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। इन केंद्रों का उपयोग चक्रवात, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लोगों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए आपदा प्रबंधन के पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक को जोड़ना जरूरी है। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें सटीक पूर्वानुमान, समय पर चेतावनी, त्वरित राहत और प्रभावी पुनर्वास के माध्यम से हर मानव जीवन और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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