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राज्य सरकार बनाएगी ‘शून्य मृत्यु गलियारे’
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तीन वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में 18,364 लोगों की मौत के बाद नई पहल
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बेहतर सड़क निर्माण, ब्लैक स्पॉट सुधार और आपातकालीन व्यवस्था पर रहेगा फोकस
भुवनेश्वर। ओडिशा में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं और उनमें हो रही मौतों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार नई सड़क सुरक्षा पहल शुरू करने की तैयारी में है। इस योजना के तहत बेहतर सड़क निर्माण के साथ-साथ राज्य में ‘शून्य मृत्यु गलियारे’ (जीरो फेटेलिटी कॉरिडोर) विकसित किए जाएंगे, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को न्यू-नतम स्तर तक लाया जा सके।
सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से 2025 के बीच राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में 18,364 लोगों की जान चली गई। विशेषज्ञों के अनुसार इन दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण अत्यधिक गति, सड़क निर्माण संबंधी खामियां तथा सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी रहे हैं।
पहले दुर्घटना संभावित मार्गों पर शुरू होगी परियोजना
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत प्रारंभिक चरण में दुर्घटना संभावित सड़कों और संवेदनशील मार्गों पर पायलट परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इन परियोजनाओं की सफलता के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि ‘फॉरगिविंग रोड’ अवधारणा के तहत ऐसी सड़कें विकसित की जाएंगी, जिनका डिजाइन दुर्घटना होने की स्थिति में टक्कर के प्रभाव को कम करने में मदद करेगा और जनहानि की संभावना घटाएगा।
सड़कों पर होंगे विशेष सुरक्षा उपाय
नई सड़क सुरक्षा योजना के तहत कई आधुनिक इंजीनियरिंग उपाय अपनाए जाएंगे। इनमें सड़क किनारे अवरोध रहित सुरक्षित क्षेत्र (क्लियर जोन), मजबूत क्रैश बैरियर, टक्कर की स्थिति में कम नुकसान पहुंचाने वाले विद्युत पोल तथा कम तीखे मोड़ विकसित किए जाएंगे, ताकि दुर्घटनाओं की गंभीरता को कम किया जा सके।
सुरक्षा ऑडिट के बाद बनेंगे शून्य मृत्यु गलियारे
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सड़कों तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के चुनिंदा हिस्सों की विस्तृत सड़क सुरक्षा ऑडिट के बाद उन्हें शून्य मृत्यु गलियारे के रूप में विकसित किया जाएगा।
इन मार्गों पर दुर्घटना के कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन कर आवश्यक संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे, ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं और मौतों को रोका जा सके।
ब्लैक स्पॉट की होगी पहचान और सुधार
योजना के तहत राज्यभर में सड़क दुर्घटनाओं वाले ब्लैक स्पॉट और संवेदनशील मार्गों की पहचान की जाएगी। इन स्थानों पर आवश्यक सुधार कार्य 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर किए जाएंगे।
चौराहों का होगा नया डिजाइन
राज्य सरकार ने सभी प्रमुख चौराहों और जंक्शनों के डिजाइन में भी बदलाव करने का निर्णय लिया है। इन्हें भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) के मानकों के अनुरूप पुनः विकसित किया जाएगा, जिससे यातायात अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके।
हाईवे पर गश्त और एंबुलेंस सेवा होगी अनिवार्य
नई योजना के अंतर्गत दुर्घटना संभावित राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर नियमित पुलिस एवं सुरक्षा गश्त सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही उच्च जोखिम वाले स्थानों पर आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं की भी अनिवार्य तैनाती की जाएगी, ताकि दुर्घटना होने पर घायलों को शीघ्र चिकित्सा सहायता मिल सके।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर भी बनेगी नीति
सरकार सड़क सुरक्षा को व्यापक रूप देने के लिए पैदल यात्रियों की सुरक्षा तथा राजमार्गों पर वे-साइड सुविधाओं के विकास के संबंध में नई नीतियां भी तैयार कर रही है।
इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सर्वोत्तम सड़क सुरक्षा प्रणालियों को अपनाने के लिए तकनीकी संस्थानों के साथ सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रही है।
चार प्रमुख शहरों में होंगे क्षेत्रीय कार्यशालाएं
योजना के प्रारंभिक चरण के बाद ब्रह्मपुर, राउरकेला, संबलपुर और कटक में क्षेत्रीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यशालाओं में सड़क सुरक्षा उपायों, पायलट परियोजनाओं के अनुभवों तथा प्रभावी क्रियान्वयन रणनीतियों को विभिन्न प्रशासनिक क्षेत्रों के अधिकारियों के साथ साझा किया जाएगा।
राज्य सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क अभिकल्पना, प्रभावी यातायात प्रबंधन, त्वरित आपातकालीन सेवाएं और जनजागरूकता के संयुक्त प्रयासों से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।
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