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स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की पहल
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युवाओं को मतदान, संविधान और चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर
भुवनेश्वर। ओडिशा में युवाओं के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों, चुनावी जागरूकता और जिम्मेदार मतदान की संस्कृति को मजबूत बनाने के उद्देश्य से राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को राज्य के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब (ईएलसी) को तत्काल पुनर्जीवित करने और उनका विस्तार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी जिलों को 19 अगस्त 2026 तक क्लबों की गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भेजने को कहा गया है।
यह निर्देश उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी-सह-उप सचिव डॉ लक्ष्मी प्रसाद साहू द्वारा जारी किया गया है। यह कदम भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा युवाओं की चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने, मतदाता जागरूकता फैलाने तथा फर्जी खबरों और भ्रामक सूचनाओं के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के राष्ट्रीय अभियान के तहत उठाया गया है।
निर्वाचन आयोग ने पाया कि जून 2026 में जारी निर्देशों के बावजूद विभिन्न जिलों में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लबों के गठन और संचालन की प्रगति संतोषजनक नहीं रही। इसे देखते हुए अब सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को इस कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
हर विद्यालय और कॉलेज में बनेंगे इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब
निर्देश के अनुसार सरकारी एवं निजी विद्यालयों, केंद्रीय विद्यालयों, सैनिक स्कूलों, जवाहर नवोदय विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों तथा अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लबों का गठन अथवा पुनर्गठन किया जाएगा।
विद्यालयों में कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थी तथा महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के छात्र-छात्राएं इन क्लबों के मुख्य सदस्य होंगे। इन क्लबों के माध्यम से युवाओं को मतदान के महत्व, संविधान और चुनावी प्रणाली की जानकारी दी जाएगी।
नोडल शिक्षक और कैंपस एंबेसडर होंगे नियुक्त
निर्वाचन विभाग ने प्रत्येक शिक्षण संस्थान में एक ईएलसी समन्वयक अथवा नोडल शिक्षक/प्राध्यापक नियुक्त करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा छात्रों के बीच नेतृत्व क्षमता विकसित करने और चुनावी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कैंपस एंबेसडर भी रोटेशन के आधार पर नियुक्त किए जाएंगे।
संविधान, मतदान और चुनावी प्रक्रिया पर होंगे नियमित कार्यक्रम
इलेक्टोरल लिटरेसी क्लबों के माध्यम से नियमित रूप से विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें संविधान के मूल्यों, भारतीय निर्वाचन आयोग की भूमिका, मतदाता सूची का निर्माण एवं अद्यतन, मतदाता पंजीकरण, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), ईवीएम और वीवीपैट का प्रदर्शन, मॉक पोल, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, वाद-विवाद, निबंध प्रतियोगिता तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियां शामिल होंगी।
इसके साथ ही पात्र विद्यार्थियों को फॉर्म-6 के माध्यम से अग्रिम मतदाता पंजीकरण के लिए आवेदन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि वे 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर आसानी से मतदाता सूची में शामिल हो सकें।
फर्जी खबरों के खिलाफ भी चलेगा जागरूकता अभियान
निर्वाचन विभाग ने क्लबों को केवल मतदान तक सीमित न रखते हुए नैतिक मतदान, फर्जी खबरों और भ्रामक सूचनाओं की पहचान, तथा जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के प्रति भी विद्यार्थियों को जागरूक करने का निर्देश दिया है।
साथ ही इलेक्टोरल लिटरेसी क्लबों की गतिविधियों को डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक युवाओं तक चुनावी जागरूकता अभियान पहुंच सके।
विधानसभा स्तर पर होगी निगरानी
निर्देश के अनुसार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब समन्वयक नियुक्त किया जाएगा, जो क्लबों की गतिविधियों की निगरानी करेगा, विभिन्न संस्थानों के बीच बेहतर कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करेगा तथा जवाबदेही तय करेगा।
सक्रिय सदस्यों को भागीदारी प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे, जबकि उत्कृष्ट और नवाचारी गतिविधियां संचालित करने वाले क्लबों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।
19 अगस्त तक देनी होगी विस्तृत रिपोर्ट
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान आयोजित इलेक्टोरल लिटरेसी क्लबों की गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट 19 अगस्त 2026 तक अनिवार्य रूप से मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भेजी जाए।
इसके अलावा वर्तमान में सक्रिय इलेक्टोरल लिटरेसी क्लबों की स्थिति भी निर्धारित गूगल ड्राइव लिंक पर अपलोड करनी होगी, ताकि राज्य स्तर पर उनकी समीक्षा की जा सके।
लोकतंत्र को कक्षा से परिसर तक ले जाने की पहल
निर्वाचन विभाग का मानना है कि यदि लोकतांत्रिक शिक्षा को विद्यालयों और महाविद्यालयों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए तो युवा केवल चुनाव के दर्शक नहीं, बल्कि जागरूक और जिम्मेदार मतदाता बनेंगे। इस पहल के माध्यम से ओडिशा में नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ते हुए विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में उनकी सक्रिय और सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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