-
मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक की
-
शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वास्थ्य और आजीविका पर दिया जोर
-
अधिकारियों को जमीनी स्तर पर परिणामोन्मुखी कार्य करने के निर्देश
भुवनेश्वर। ओडिशा की मुख्य सचिव अनु गर्ग ने कहा है कि विकसित ओडिशा-2036 और विकसित भारत-2047 के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने में जनजातीय युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय को विकास की मुख्यधारा से और अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने के लिए शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, पोषण, आजीविका और रोजगार सृजन के क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर परिणाम देने वाले कार्य किए जाएं।
लोक सेवा भवन स्थित अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं अल्पसंख्यक तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के सम्मेलन कक्ष में विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि केवल योजनाओं का क्रियान्वयन पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी परिणाम सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से पारंपरिक कार्यशैली से बाहर निकलकर परिवर्तनकारी दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
2047 तक 15 गुना अधिक होगी अर्थव्यवस्था
मुख्य सचिव ने कहा कि ओडिशा सरकार ने वर्ष 2036 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को 500 अरब डॉलर तथा 2047 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह वर्तमान अर्थव्यवस्था के आकार से लगभग 15 गुना अधिक होगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के साथ राज्य में एक करोड़ से अधिक नए रोजगार सृजित करने का भी उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि यह तभी संभव होगा जब समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर जनजातीय समुदाय, की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर विशेष ध्यान देना होगा
उन्होंने कहा कि कृषि, उद्योग, आधारभूत संरचना, मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण तथा सेवा क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर विशेष ध्यान देना होगा। जनजातीय युवाओं को इन सभी क्षेत्रों में सक्षम बनाकर राज्य की आर्थिक प्रगति का भागीदार बनाया जा सकता है।
लगभग 37 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में वन
अनु गर्ग ने कहा कि ओडिशा के लगभग 37 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में वन हैं और इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय निवास करता है। इसलिए इन समुदायों का समग्र विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार पहले से ही जनजातीय विद्यार्थियों और समुदायों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है।
कमजोर जनजातीय समूहों के विकास पर फोकस
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा निःशुल्क शिक्षा, छात्रावास सुविधा, छात्रवृत्ति, आश्रम विद्यालय, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, वर्दी, अध्ययन सामग्री, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग, उच्च शिक्षा सहायता तथा छात्रवृत्ति की प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा पीएम-जनमन योजना सहित कई विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विद्यार्थी जीवन से ही जनजातीय बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, खेलकूद और व्यावसायिक प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, ताकि वे भविष्य में राज्य और देश की आर्थिक प्रगति में सार्थक योगदान दे सकें।
योजनाओं को गांव स्तर तक लागू करने पर बल
उन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय तथा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के सशक्तीकरण के लिए लक्षित और परिणामोन्मुखी योजनाओं को गांव स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने पर बल दिया।
अनु गर्ग ने कहा कि समृद्धि, स्वास्थ्य और समानता के तीन प्रमुख स्तंभों को आधार बनाकर स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, कौशल विकास, आजीविका, उद्यमिता, डिजिटल शिक्षा, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, जवाबदेही तथा परिणाम आधारित प्रशासन पर विशेष ध्यान देना होगा। इससे जनजातीय समुदाय राज्य के समावेशी विकास का मजबूत साझेदार बन सकेगा।
सफल छात्रों को विद्यालयों से जोड़ने का निर्देश
मुख्य सचिव ने एक अभिनव पहल का सुझाव देते हुए कहा कि देश और विदेश में उच्च शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान, तकनीक, उद्योग तथा अन्य क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर चुके जनजातीय युवाओं को आश्रम विद्यालयों और विभागीय स्कूलों के विद्यार्थियों से जोड़ा जाना चाहिए। विद्यालयों में उनके प्रत्यक्ष भ्रमण अथवा ऑनलाइन संवाद के माध्यम से वे अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे जनजातीय विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और बेहतर करियर बनाने की प्रेरणा मिलेगी।
आर्थिक सशक्तीकरण पर विशेष जोर
आर्थिक सशक्तीकरण पर विशेष जोर देते हुए अनु गर्ग ने कहा कि वन उपज के मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण के माध्यम से लघु एवं घरेलू उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे जनजातीय परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि ईको-टूरिज्म, टूर गाइड, आतिथ्य सेवा, हाउसकीपिंग तथा सेवा क्षेत्र के अन्य व्यवसायों में प्रशिक्षण देकर बड़ी संख्या में जनजातीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे राज्य की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बनेंगे।
बैठक में विभाग के आयुक्त-सह-सचिव बी परमेश्वरन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं विभिन्न जिलों से समेकित जनजातीय विकास अभिकरण (आईटीडीए) के परियोजना प्रशासक, जिला कल्याण अधिकारी तथा माइक्रो प्रोजेक्ट्स के विशेष अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए। बैठक में विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के साथ आगामी कार्ययोजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
