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तीन सदस्यीय जांच समिति ने संस्थान का किया दौरा
ब्रह्मपुर। ओडिशा स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने बुधवार को एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमकेसीजीएमसीएच) में पोस्टग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक के आरोपों की जांच शुरू कर दी।
समिति ने संस्थान का दौरा कर पूरे मामले की परिस्थितियों का आकलन किया और यह पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच शुरू की कि परीक्षा शुरू होने से पहले गोपनीय प्रश्नपत्र कथित रूप से कैसे प्रसारित हुए।
जांच समिति में स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव विजय कुमार दास, अतिरिक्त सचिव डॉ विजय कुमार मिश्र और संयुक्त डीएमईटी डॉ अनिल कुमार मिश्रा शामिल हैं।
यह जांच उन गंभीर आरोपों के बाद शुरू की गई है, जिनमें कहा गया है कि ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज द्वारा आयोजित पीजी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले व्हाट्सएप के जरिए साझा किए गए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 21 जुलाई और 27 जुलाई को आयोजित परीक्षाओं के प्रश्नपत्र सुबह लगभग 9:58 बजे निर्धारित समय 10:00 बजे से मात्र दो मिनट पहले साझा किए गए थे। यह भी आरोप है कि विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के छात्रों को शामिल करते हुए एक विशेष व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था, जिसके माध्यम से प्रश्नपत्र प्रसारित किए गए।
जांच समिति से उम्मीद है कि वह आरोपों की सत्यता की पुष्टि करेगी, जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगी और आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश करेगी। इस मामले ने राज्य की पीजी मेडिकल परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए ओयूएचएस के कुलपति प्रो मनश रंजन साहू ने स्पष्ट किया कि यह प्रश्नपत्र लीक का मामला नहीं, बल्कि कदाचार (मालप्रैक्टिस) का मामला है।
उन्होंने कहा कि यह प्रश्नपत्र लीक का मामला नहीं है। प्रश्नपत्र वितरण के बाद परीक्षा कक्ष से बाहर चला गया। इसलिए यह कदाचार का मामला है। विश्वविद्यालय में ऐसे मामलों के लिए कड़े दिशा-निर्देश हैं और एक अनुशासनात्मक समिति गठित की गई है। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है, तो निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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