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पांडुलिपि से लेकर छपाई और वितरण तक होगी जांच
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25 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के भी मिले प्रारंभिक संकेत
भुवनेश्वर। ओडिशा की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में सामने आई व्यापक त्रुटियों के मामले में अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए 250 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को जांच के दायरे में लिया है। एजेंसी पांडुलिपि तैयार करने से लेकर पुस्तक की छपाई और वितरण तक की पूरी प्रक्रिया की तकनीकी एवं फोरेंसिक जांच कर रही है।
क्राइम ब्रांच के महानिदेशक विनयतोष मिश्र ने बताया कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। पूरे तंत्र की गहन पड़ताल की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि त्रुटियां जानबूझकर की गईं या लापरवाही के कारण हुईं। साथ ही यह भी आकलन किया जा रहा है कि इन गलतियों का विद्यार्थियों की पढ़ाई पर कितना प्रभाव पड़ा।
जांच के दायरे में शिक्षक शिक्षा निदेशालय, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), टेक्स्टबुक प्रिपरेशन एंड मार्केटिंग (टीबीपीएम) शाखा तथा ओडिशा स्कूल एजुकेशन प्रोग्राम अथॉरिटी (ओएसईपीए) जैसी प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।
जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के भी प्रारंभिक संकेत मिले हैं। जानकारी के अनुसार, कागज की खरीद, छपाई, समिति व्यय और परिवहन पर लगभग 175 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन क्राइम ब्रांच को अब तक करीब 25 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के प्रारंभिक प्रमाण मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक, संदेह के घेरे में आए पांच अधिकारियों को जल्द पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
इस मामले में पहले ही प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई हो चुकी है। पूर्व एससीईआरटी निदेशक मनोज पाढ़ी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन सहायक निदेशकों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा छह अन्य सहायक निदेशकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।
इसी बीच, एससीईआरटी के सहायक निदेशक प्रलिप्ता मिश्रा, दिलीप कुमार साहू, किशोर कुमार कर और भारती टुडू ने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए ओडिशा उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है।
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