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बौद्धिक दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और थेरेपी के लिए नई व्यवस्था लागू
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नियमों का पालन नहीं करने पर अनुदान रोका जा सकेगा
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने राज्य के सभी सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विशेष विद्यालयों में बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के लिए ‘दिशा’ पाठ्यक्रम को अनिवार्य कर दिया है। सामाजिक सुरक्षा एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण (एसएसईपीडी) विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सभी विद्यालयों में दिशा पोर्टल, व्यक्तिगत शिक्षा कार्यक्रम (आईईपी), व्यक्तिगत थेरेपी कार्यक्रम (आईटीपी) तथा निर्धारित मूल्यांकन प्रणाली को लागू करना होगा।
मुंबई स्थित जय वकील फाउंडेशन एंड रिसर्च सेंटर द्वारा विकसित तथा राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीआईडी) से मान्यता प्राप्त दिशा पाठ्यक्रम बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के शैक्षिक एवं कार्यात्मक विकास के लिए एक व्यापक ढांचा उपलब्ध कराता है। यह पाठ्यक्रम वर्ष 2019 से ओडिशा के कुछ विशेष विद्यालयों में लागू है।
जिला कलेक्टर एवं जिलाधिकारी निगरानी करेंगे
नई व्यवस्था के तहत जिला कलेक्टर एवं जिलाधिकारी इसकी निगरानी करेंगे, जबकि जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी (डीएसएसओ) समन्वय, मॉनिटरिंग और क्षमता विकास के नोडल अधिकारी होंगे। प्रत्येक शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में सभी विद्यालयों को अपने संस्थान, शिक्षकों, थेरेपिस्ट और विद्यार्थियों का पंजीकरण दिशा पोर्टल पर करना होगा।
प्रत्येक विद्यार्थी का प्रारंभिक मूल्यांकन होगा
प्रत्येक विद्यार्थी का प्रारंभिक मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके आधार पर अभिभावकों, शिक्षकों और थेरेपिस्ट की सहभागिता से व्यक्तिगत शिक्षा कार्यक्रम (आईईपी) तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही संचार कौशल, दैनिक जीवन कौशल, गतिशीलता, सामाजिक व्यवहार, स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और फिजियोथेरेपी को शामिल करते हुए व्यक्तिगत थेरेपी कार्यक्रम (आईटीपी) भी तैयार किया जाएगा, जिसकी समय-समय पर समीक्षा होगी।
बहु-संवेदी शिक्षण पद्धति अपनानी होगी
विशेष विद्यालयों को पाठ्यक्रम के अनुरूप बहु-संवेदी शिक्षण पद्धति अपनानी होगी। मध्यावधि एवं वार्षिक मूल्यांकन दिशा पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा तथा विद्यार्थियों की प्रगति रिपोर्ट अभिभावक-शिक्षक बैठकों में साझा की जाएगी।
अतिरिक्त सचिव भास्कर रायतो द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि पाठ्यक्रम और संबंधित निर्देशों का पालन नहीं करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें अनुदान सहायता (ग्रांट-इन-एड) रोकना भी शामिल है।
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