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तप्तपाणी स्थित जनजातीय आस्था के प्रमुख पीठ पर पहुंचने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बनीं
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देश में शांति, समृद्धि, एकता और जनकल्याण की कामना की
ब्रह्मपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को गंजाम जिले के तप्तपाणी स्थित मां कांधुनी देवी पीठ में दर्शन-पूजन कर इतिहास रच दिया। वह इस जनजातीय आस्था के पवित्र स्थल पर पहुंचने वाली देश की पहली मौजूदा राष्ट्रपति बनीं। राष्ट्रपति ने मां कांधुनी देवी से देश में शांति, समृद्धि, एकता और जनकल्याण की कामना की। इस ऐतिहासिक यात्रा को जनजातीय समाज के लिए गौरव और सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।
राष्ट्रपति के आगमन पर मंदिर परिसर शंखध्वनि, घंटनाद और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। सदियों पुरानी जनजातीय परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार मंदिर के पुजारियों तथा स्थानीय जनजातीय समुदाय ने उनका पारंपरिक स्वागत किया।
निर्धारित धार्मिक अनुष्ठानों के बाद राष्ट्रपति ने मां कांधुनी देवी की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके उपरांत उन्होंने समीप स्थित महादेव मंदिर में भी दर्शन किए और आरती में शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया।
मंदिर के मुख्य पुजारी प्रशांत कुमार जानी ने इसे मंदिर के इतिहास का स्वर्णिम क्षण बताते हुए कहा कि पहली बार देश की प्रथम नागरिक ने जनजातीय आस्था के इस पवित्र पीठ पर दर्शन किए हैं। इससे पूरे जनजातीय समाज में गर्व, उल्लास और आध्यात्मिक संतोष का वातावरण है। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्रपति की इस यात्रा से तप्तपाणी और आसपास के जनजातीय क्षेत्रों को नई पहचान मिलेगी तथा धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्रपति की इस ऐतिहासिक यात्रा से पूरे तप्तपाणी क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा। स्थानीय श्रद्धालुओं और जनजातीय समुदाय ने इसे केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और आस्था को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान के रूप में देखा।
राष्ट्रपति की इस यात्रा ने मां कांधुनी देवी पीठ की धार्मिक महत्ता के साथ-साथ गंजाम की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। यह ऐतिहासिक अवसर आस्था, सांस्कृतिक समरसता और समावेशी राष्ट्रीय गौरव का प्रेरणादायी प्रतीक बन गया।
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