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22 जिलों के 8.63 लाख लोग प्रभावित
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तटबंधों की युद्धस्तर पर मरम्मत
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जल संसाधन विभाग ने निगरानी बढ़ाई
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने हालिया बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए राहत पैकेज की घोषणा करते हुए पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1.20 लाख रुपये तक मुआवजा देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही जल संसाधन विभाग ने बाढ़ के बाद पुनर्बहाली कार्यों में तेजी लाते हुए राज्यभर में तटबंधों की मरम्मत, सिंचाई संरचनाओं की बहाली और 24 घंटे निगरानी शुरू कर दी है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि जिन क्षेत्रों से बाढ़ का पानी उतर चुका है, वहां राजस्व और कृषि विभाग की टीमें नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही हैं। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1.20 लाख रुपये, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कच्चे मकानों के लिए 4,000 रुपये तथा पूरी तरह नष्ट हुई झोपड़ियों के लिए 8,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से राहत मिलेगी।
8,63,909 लोग प्रभावित
राज्य में बाढ़ से 22 जिले, 85 ब्लॉक और 1,458 गांव प्रभावित हुए हैं, जिससे 8,63,909 लोग प्रभावित हुए हैं। सरकार ने कहा है कि सर्वेक्षण पूरा होते ही राहत एवं पुनर्वास सहायता शीघ्र वितरित की जाएगी।
इधर, जल संसाधन विभाग ने बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त तटबंधों और जल संरचनाओं की मरम्मत युद्धस्तर पर शुरू कर दी है। वरिष्ठ अभियंता विभिन्न जिलों में मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं, जबकि मरम्मत दल दिन-रात कार्य में जुटे हैं।
अस्थायी कटाव की तत्काल मरम्मत शुरू
जाजपुर जिले में ब्राह्मणी नदी के दाहिने तटबंध पर ब्रह्मचारीपाटना तथा किमिरीपाल के पास बने अस्थायी कटाव की तत्काल मरम्मत शुरू कर दी गई है। इसके लिए भारी मशीनरी, निर्माण सामग्री और अतिरिक्त श्रमिक लगाए गए हैं।
कमजोर तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी
कटक, पुरी, खुर्दा और जगतसिंहपुर जिलों से गुजरने वाली दया, राजुआ, मकरा, भार्गवी, महानदी, कुशभद्रा और देवी नदियों के सभी तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। जहां भी कमजोर स्थान मिले हैं, वहां तत्काल सुदृढ़ीकरण कर संभावित कटाव को रोका गया है।
सभी अभियंताओं को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश
मुख्य अभियंता दिलीप कुमार राउत की अध्यक्षता में बाढ़ नियंत्रण कक्ष में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक भी हुई, जिसमें हीराकुद जलाशय के संचालन, नदियों के जलप्रवाह, निचले इलाकों की स्थिति और पुनर्बहाली कार्यों की समीक्षा की गई। सभी अभियंताओं को हाई अलर्ट पर रहने, चौबीसों घंटे निगरानी बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य के सभी प्रमुख बांधों, जलाशयों, तटबंधों और सिंचाई परियोजनाओं की लगातार निगरानी की जा रही है तथा जहां भी नुकसान हुआ है, वहां तत्काल मरम्मत कराई जा रही है। जनसुरक्षा और जल संसाधन ढांचे की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
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