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मंत्रिमंडल ने ‘मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन 2.0’ को दी मंजूरी

  •     2,995 करोड़ रुपये से 8 लाख जनजातीय परिवारों को मिलेगा लाभ

  •     हर पात्र परिवार को 30 हजार रुपये की सहायता

  •     19 जिलों में आजीविका, सिंचाई, प्रसंस्करण और विपणन सुविधाओं का होगा विस्तार

  •     विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों पर विशेष फोकस

भुवनेश्वर। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में शनिवार को लोक सेवा भवन में आयोजित ओडिशा मंत्रिमंडल की 45वीं बैठक में ‘मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन (एमएमजेजेएम) 2.0’ को मंजूरी दे दी गई। छह विभागों के 11 प्रस्तावों में शामिल इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 2,995 करोड़ रुपये खर्च कर राज्य के 8 लाख जनजातीय परिवारों, जिनमें सभी विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवार शामिल हैं, की आजीविका को मजबूत किया जाएगा।

यह पूर्णतः राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। इसके तहत 19 जिलों134 जनजातीय उपयोजना एवं माइक्रो प्रोजेक्ट क्षेत्र के ब्लॉकों23 एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियों तथा 20 माइक्रो प्रोजेक्ट क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। योजना का पहला चरण पहले ही 13 जिलों के 1.5 लाख जनजातीय परिवारों तक पहुंच चुका है।

योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें जनजातीय परिवारों को उनकी स्थानीय परिस्थितियों, संसाधनों और बाजार की संभावनाओं के अनुसार अपनी पसंद का आजीविका विकल्प चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी। लाभार्थी कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, रेशम उत्पादन, लघु वनोपज आधारित गतिविधियां, हस्तशिल्प, हथकरघा तथा ग्रामीण उद्यम जैसे क्षेत्रों में अपनी पसंद का कार्य चुन सकेंगे।

प्रत्येक पात्र परिवार को 30 हजार रुपये की सहायता दो किश्तों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

योजना के तहत केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि सिंचाई सुविधाओं, फसल भंडारण, प्रसंस्करण इकाइयों और विपणन नेटवर्क का भी विकास किया जाएगा, ताकि जनजातीय परिवारों की आय में वास्तविक वृद्धि सुनिश्चित हो सके।

विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवारों के लिए योजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं। इनके बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए पोषण सहायता तथा पीवीटीजी बस्तियों में क्रेच (शिशु देखभाल केंद्र) की व्यवस्था की जाएगी।

इसके अलावा, स्थानीय जरूरतों के अनुसार आधारभूत ढांचा विकसित करने के लिए 500 करोड़ रुपये का विशेष फ्लेक्सी फंड भी बनाया गया है, जिससे गांव स्तर पर चिन्हित आवश्यकताओं को शीघ्र पूरा किया जा सके।

राज्य सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन 2.0 से जनजातीय परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा, सामुदायिक संस्थाएं मजबूत होंगी और जनजातीय क्षेत्रों में समावेशी एवं टिकाऊ विकास को नई गति मिलेगी। यह योजना राज्य के आठ लाख जनजातीय परिवारों के जीवन स्तर में व्यापक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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