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दत्तात्रेय होसबाले ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती को बताया ‘वीर और तपस्वी’
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बोले— भारत में धर्म विरोधी गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन समाज कभी झुकेगा नहीं
भुवनेश्वर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि धर्म, राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करने वालों को हिंसा और हत्याओं के जरिए कभी नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि केरल, तमिलनाडु सहित देश के कई राज्यों में राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुई हैं, लेकिन ऐसे हमलों के बावजूद समाज और राष्ट्र की सेवा का कार्य न कभी रुका है और न ही रुकेगा।
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती पर आधारित पुस्तक ‘वेदांत केशरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती : व्यक्ति व कृतित्व’ के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए होसबाले ने कहा कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, झारखंड और अन्य राज्यों में भी धर्म और राष्ट्र के कार्य में लगे लोगों पर हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि भारत का समाज ऐसे संकटों के सामने कभी नहीं झुका और भविष्य में भी अपने दायित्वों से पीछे हटने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का जीवन केवल एक संत का जीवन नहीं था, बल्कि धर्म जागरण, धर्म रक्षा और समाज संगठन का विराट अभियान था। उन्होंने अपने जीवनकाल में हजारों-लाखों लोगों को धर्म और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया। उनके बलिदान के 18 वर्ष बाद भी समाज उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण कर रहा है और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प ले रहा है।
होसबाले ने पुस्तक के लेखक और प्रकाशकों को बधाई देते हुए कहा कि यह केवल किसी संत की प्रशंसा का ग्रंथ नहीं, बल्कि समाज को प्रेरित करने वाला दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्य की आवश्यकता इसलिए है ताकि देश और धर्म के लिए समर्पित व्यक्तित्वों से नई पीढ़ी प्रेरणा ले सके और राष्ट्र निर्माण के कार्य में आगे आए।
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के लिए “वीर” और “तपस्वी” जैसे शब्दों का प्रयोग किया है, जो उनके संपूर्ण व्यक्तित्व का सटीक परिचय देते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में दो प्रकार के महापुरुष होते हैं— एक वे, जो अपने तप और साधना से आध्यात्मिक ऊंचाइयों को प्राप्त करते हैं, और दूसरे वे, जो राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा के लिए वीरगति को प्राप्त होते हैं। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जीवन में ये दोनों गुण एक साथ दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ने गृहस्थ जीवन के मोह-माया से दूर रहकर अपना संपूर्ण जीवन वनवासी समाज, गौ संरक्षण, धर्म जागरण और समाज सेवा को समर्पित कर दिया। वे समाज के दुख-दर्द को दूर करने और लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए निरंतर प्रेरित करते रहे।
होसबाले ने कहा कि वर्तमान समय में भारत में धर्म विरोधी गतिविधियां चल रही हैं, इसलिए समाज को अधिक जागरूक और संगठित होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का जीवन संघर्ष, तप, सेवा और बलिदान का प्रतीक है तथा उनका जीवन समाज के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
भारत की सुरक्षा और विश्व के मार्गदर्शन में अहम भूमिका निभाए, इसके लिए नई पीढ़ी को स्वामी लक्ष्मणानंद से प्रेरणा लेनी होगी: दत्तात्रेय होसबाले
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करने और विश्व का मार्गदर्शन करने में देश की भूमिका निरंतर बनी रहे, इसके लिए वर्तमान पीढ़ी को स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जैसे महापुरुषों के विचारों और जीवन-दर्शन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से उनके जीवन पर आधारित पुस्तक का विशेष महत्व है।
पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए होसबाले ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के विचारों को समझना, उनके जीवन-दर्शन का अध्ययन करना और उनके संदेश को समाज तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराने वाला प्रेरक ग्रंथ है।
उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि एक विचार, एक दर्शन और एक सतत प्रेरणा के स्रोत थे। ऐसे महापुरुष भले ही मानव शरीर धारण करके समाज में आते हैं, लेकिन उनका जीवन व्यक्तिगत सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज के लिए मार्गदर्शक बन जाता है।
होसबाले ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के आदर्शों, त्याग, सेवा और राष्ट्रनिष्ठा को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए, ताकि भारत भविष्य में भी विश्व को दिशा देने की अपनी ऐतिहासिक भूमिका का सफलतापूर्वक निर्वहन करता रहे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्वामी जी के जीवन पर आधारित यह पुस्तक समाज में राष्ट्रभाव, सांस्कृतिक चेतना और सेवा के संस्कार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
समारोह में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, स्वामी जीवन मुक्तानंद पुरी, स्वामी प्रेमानंद महाराज सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास के न्यासी मनसुखलाल सेठिया ने किया।
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