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हिंदुत्व विरोधी ताकतों को ओडिशा की धरती से कड़ी चेतावनी

  • हिंसा और हत्याओं से राष्ट्रभक्तों को नहीं रोका जा सकता

  • मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और संत समाज का एक स्वर— सनातन भारत की आत्मा, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के अधूरे सपनों को पूरा करने का लिया संकल्प

  • ओडिशा को चर्च मुक्त बनाने का अनुमान

भुवनेश्वर। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती पर आधारित पुस्तक ‘वेदांत केशरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती : व्यक्ति व कृतित्व’ के विमोचन समारोह में ओडिशा से हिंदुत्व विरोधी ताकतों के खिलाफ तीखा संदेश दिया गया। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले तथा देशभर से आए संत-महात्माओं ने एक स्वर में कहा कि सनातन और राष्ट्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों को हिंसा, हत्याओं या षड्यंत्रों के जरिए कभी नहीं रोका जा सकता। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के अधूरे सपनों को पूरा करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

समारोह में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि सनातन केवल जीवन नहीं, बल्कि जीवन जीने का आधार है और हिंदुत्व भारत की आत्मा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुत्व को कमजोर करने और उसकी पहचान बदलने की साजिश रची जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री के संबोधन से पहले मंच से ओडिशा को चर्च मुक्त बनाने का आह्वान भी किया गया। संत समाज ने विधर्मियों की गतिविधियों पर रोक लगाने तथा कंधमाल के प्रत्येक गांव तक पहुंचकर धर्म, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता का संदेश फैलाने का संकल्प व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जनजातीय और वनवासी समाज के लिए पिता तुल्य थे। उन्होंने वनवासी बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया, शिक्षा और संस्कार के माध्यम से समाज को नई दिशा दी तथा कंध समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और सनातन परंपरा की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी हिंदुत्व, गौ संरक्षण और वनवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए हिमालय की तरह अडिग रहे।

मुख्यमंत्री ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय की सरकार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा देने में विफल रही। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से न्यायिक आयोग की रिपोर्ट तलाशने का प्रयास किया जा रहा है तथा सीबीआई जांच को भी सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने कंधमाल स्थित स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती आश्रम के विकास के लिए ₹13 करोड़ की स्वीकृति की घोषणा की। साथ ही कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में स्वामी जी के जीवन और दर्शन पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी तथा उनकी जीवनी पर आधारित पुस्तक सभी पुस्तकालयों तक पहुंचाई जाएगी।

वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने चार दशक पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री हरेकृष्ण महताब कंधमाल में तेजी से हो रहे धर्मांतरण को लेकर बेहद चिंतित थे। उन्होंने बताया कि उस समय कंध समुदाय के लोगों का बड़ी संख्या में ईसाई धर्म में धर्मांतरण हो रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महताब ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ अधिकारी भूपेन बसू को संदेश भिजवाया कि आपके संपर्क में कोई संत हैं तो उन्हें तत्काल फुलबाणी भेजने की आवश्यकता है। उनका मानना था कि यदि समय रहते ऐसा नहीं किया गया तो फुलबाणी और कंधमाल हाथ से निकल जाएगा।

उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने अपना पूरा जीवन सनातन, भारतीय मूल्यों और समाज की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, झारखंड सहित कई राज्यों में राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुई हैं, लेकिन हिंसा और आतंक के बल पर धर्म और राष्ट्र के लिए कार्य करने वालों को कभी नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास संघर्षों का इतिहास है और समाज कभी भी ऐसी ताकतों के सामने झुका नहीं है।

होसबाले ने कहा कि भारत को विश्व का मार्गदर्शक बनाए रखने के लिए वर्तमान पीढ़ी को स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के विचारों और जीवन-दर्शन से प्रेरणा लेनी होगी। उन्होंने कहा कि स्वामी जी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार, एक दर्शन और राष्ट्रजीवन की प्रेरक शक्ति हैं। उनकी जीवनी नई पीढ़ी में राष्ट्रभाव, सांस्कृतिक चेतना और सेवा के संस्कारों को मजबूत करेगी।

समारोह में स्वागत भाषण देते हुए स्वामी जीवन मुक्तानंद पुरी ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के अधूरे सपनों को पूरा करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने उनकी जीवनी पर आधारित पुस्तक को देश के सभी पुस्तकालयों में उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कंधमाल को पूरे देश के लिए एक प्रयोगशाला बताते हुए उसके अनुभवों का राष्ट्रीय स्तर पर अनुसरण करने की आवश्यकता जताई। कार्यक्रम में धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रत्येक व्यक्ति से “धर्म के नाम पर एक रुपया और एक घंटा” देने का आह्वान भी किया गया।

समारोह में संत-महात्माओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के त्याग, तपस्या और बलिदान को स्मरण करते हुए उनके अधूरे संकल्पों को पूरा करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि सेवा, संस्कार, राष्ट्रभक्ति और सनातन मूल्यों के संरक्षण का अभियान आगे भी पूरी शक्ति से जारी रहेगा और किसी भी प्रकार की हिंसा, भय या षड्यंत्र से इसे रोका नहीं जा सकेगा।

समारोह में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, स्वामी जीवन मुक्तानंद पुरी, स्वामी प्रेमानंद महाराज सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास के न्यासी मनसुखलाल सेठिया ने किया।

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