Home / Odisha / कंधमाल में तेजी से हो रहे धर्मांतरण से चिंतित थे हरेकृष्ण महताब

कंधमाल में तेजी से हो रहे धर्मांतरण से चिंतित थे हरेकृष्ण महताब

  • आरएसएस को भिजवाया था संदेश— तुरंत एक संत को फुलबाणी भेजिए: धर्मेंद्र प्रधान

  • ‘वेदांत केशरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती : व्यक्ति व कृतित्व’ पुस्तक के विमोचन पर धर्मेंद्र प्रधान ने साझा की चार दशक पुरानी स्मृतियां

  • कहा— स्वामी जी नहीं गए होते तो कंधमाल की तस्वीर अलग होती

भुवनेश्वर। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने चार दशक पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री हरेकृष्ण महताब कंधमाल में तेजी से हो रहे धर्मांतरण को लेकर बेहद चिंतित थे। उन्होंने बताया कि उस समय कंध समुदाय के लोगों का बड़ी संख्या में ईसाई धर्म में धर्मांतरण हो रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महताब ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ अधिकारी भूपेन बसू को संदेश भिजवाया कि आपके संपर्क में कोई संत हैं तो उन्हें तत्काल फुलबाणी भेजने की आवश्यकता है। उनका मानना था कि यदि समय रहते ऐसा नहीं किया गया तो फुलबाणी और कंधमाल हाथ से निकल जाएगा।

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती पर आधारित पुस्तक ‘वेदांत केशरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती : व्यक्ति व कृतित्व’ के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि तत्कालीन परिस्थितियों में हरेकृष्ण महताब को विश्वास था कि केवल आरएसएस और उसके माध्यम से सेवा कार्यों में जुटे साधु-संत ही वनवासी क्षेत्रों में तेजी से हो रहे धर्मांतरण पर प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं। इसी सोच के तहत संघ से फुलबाणी में एक संत भेजने का आग्रह किया गया और बाद में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती को वहां भेजा गया।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यदि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती फुलबाणी नहीं गए होते, तो आज कंधमाल की परिस्थितियां बिल्कुल अलग होतीं। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने वहां पहुंचकर शिक्षा, सेवा, संस्कार और समाज जागरण के माध्यम से वनवासी समाज में आत्मविश्वास जगाया और सनातन परंपरा को सशक्त करने का कार्य किया।

उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती केवल एक संत नहीं, बल्कि जननायक थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन में सनातन धर्म, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और समाज की रक्षा के लिए संघर्ष किया। वनवासी समाज के उत्थान, शिक्षा के प्रसार, गौ संरक्षण और सामाजिक जागरण के क्षेत्र में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

धर्मेंद्र प्रधान ने लगभग 40 वर्ष पुरानी एक अन्य घटना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पानिकोइलि में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की गिरफ्तारी की आशंका के दौरान वह स्वयं 40 से 50 युवाओं के साथ उनकी सुरक्षा के लिए वहां पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में स्वामी जी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग समाज और संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ने कभी निजी हितों के लिए काम नहीं किया। उनका संपूर्ण जीवन समाज जागरण, वनवासी सेवा, सनातन धर्म की रक्षा और राष्ट्रीय मूल्यों के संरक्षण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि स्वामी जी के जीवन और कृतित्व पर आधारित यह पुस्तक नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से परिचित कराएगी और समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराएगी।

समारोह में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, स्वामी जीवन मुक्तानंद पुरी, स्वामी प्रेमानंद महाराज सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास के न्यासी मनसुखलाल सेठिया ने किया।

Share this news

About admin

Check Also

IAT NEWS INDO ASIAN TIMES ओडिशा की खबर, भुवनेश्वर की खबर, कटक की खबर, आज की ताजा खबर, भारत की ताजा खबर, ब्रेकिंग न्यूज, इंडिया की ताजा खबर

जाजपुर में देह व्यापार गिरोह का भंडाफोड़

    दो महिलाओं समेत पांच हिरासत में     मुख्य डाकघर के पास मकान …