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‘कैच द रेन’ अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान, हर बूंद बचाने की अपील
भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात‘ में ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में वर्षा जल संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘कैच द रेन‘ अभियान के तहत भुवनेश्वर सहित देश के कई शहरों और गांवों में वर्षा जल संचयन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘कैच द रेन‘ अभियान का मूल मंत्र है-“जहां बारिश हो, जब बारिश हो, वहीं उसे संचित करें।” इस अभियान का उद्देश्य भूजल स्तर बढ़ाना और भविष्य के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित करना है। उन्होंने कहा कि गांवों, शहरों, पंचायतों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई है।
भुवनेश्वर समेत कई शहरों का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में भी इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने ओडिशा के भुवनेश्वर, छत्तीसगढ़ के कोरबा तथा आंध्र प्रदेश के नंदयाल और विजयनगरम का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इन शहरों ने वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किए हैं।
तालाब, कुएं और जलाशयों को पुनर्जीवित करने की अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल सरकार के प्रयासों से जल सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, इसके लिए जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपने आसपास के तालाब, कुएं, बावड़ी और अन्य जल स्रोतों को साफ करने, पुनर्जीवित करने, छोटे चेक डैम बनाने और वर्षा जल संचयन को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में लोग पुराने तालाबों और जलाशयों को पुनर्जीवित कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश के नंदयाल में सभी गांव इस अभियान से जुड़कर पुराने तालाबों को फिर से उपयोगी बना रहे हैं।
‘हर बूंद भविष्य की अमूल्य धरोहर‘
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपने आसपास कम से कम एक जल स्रोत की जिम्मेदारी लेने की अपील करते हुए कहा कि “पानी की बचाई गई हर बूंद आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है।” उन्होंने जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने और सामूहिक प्रयासों से देश की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
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