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नीलाद्रि बिजे के साथ रत्न वेदी पर विराजेंगे महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा
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रसगुल्ला भोग के साथ होगा श्रीमंदिर प्रवेश
पुरी। विश्वविख्यात श्रीजगन्नाथ रथयात्रा महापर्व की शेष प्रमुख धार्मिक नीतियों के अंतर्गत ‘अधर पणा’ अनुष्ठान श्रद्धा और परंपरा के साथ संपन्न हुआ। सभी निर्धारित नीतियां पूरी होने के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों रथों पर विशेष पात्रों में अधर पणा (शर्बत) अर्पित किया गया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार रथयात्रा के दौरान देवताओं के साथ अनेक पवित्र एवं दिव्य आत्माएं भी रथों के साथ रहती हैं। इन्हीं आत्माओं की तृप्ति के लिए अधर पणा अर्पित किया जाता है। परंपरा के अनुसार इस पणा के समर्पण के बाद ये पवित्र आत्माएं अपने-अपने लोक को प्रस्थान करती हैं। यह अनुष्ठान रथयात्रा की महत्वपूर्ण और अंतिम नीतियों में से एक माना जाता है।
अब 27 जुलाई सोमवार को ‘नीलाद्रि बिजे’ की परंपरा के साथ महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा पुनः श्रीमंदिर में प्रवेश करेंगे। मान्यता है कि श्रीमंदिर लौटने के दौरान भगवान श्रीजगन्नाथ माता महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए रसगुल्ला भोग अर्पित करते हैं। इसके बाद तीनों देव-देवी पुनः रत्न वेदी पर विराजमान होंगे।
नीलाद्रि बिजे के साथ ही विश्वविख्यात श्रीजगन्नाथ रथयात्रा महापर्व की सभी धार्मिक नीतियां विधिवत संपन्न हो जाएंगी और महाप्रभु अपने मूल आसन पर विराजित होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।
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