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पुरी में रथों पर विराजमान महाप्रभु के दर्शन को लाखों श्रद्धालु पहुंचे

  •     26 को अधर पणा और 27 को नीलाद्रि बीजे की नीति

पुरी। महाप्रभु श्रीजगन्नाथ की बाहुड़ा यात्रा सकुशल संपन्न हो गई है। अब पुरी में सोना वेश के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। शुक्रवार देर शाम महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ श्रीमंदिर के सिंहद्वार के समक्ष पहुंच गए। इसके बाद रथों पर विराजमान तीनों देवों के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंच रहे हैं।

श्रीमंदिर के समक्ष श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हैं। पूरा बड़दांड ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरि बोल’ के जयघोष से गुंजायमान है। भक्ति और श्रद्धा का ऐसा अद्भुत वातावरण बना हुआ है कि हर श्रद्धालु महाप्रभु की एक झलक पाने को आतुर दिखाई दे रहा है। देश-विदेश से आए भक्त भक्ति रस में डूबकर महाप्रभु के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।

रथों पर विराजमान महाप्रभु के सोना वेश का दर्शन रथयात्रा पर्व का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।

रथयात्रा की शेष प्रमुख नीतियों के तहत कल 26 जुलाई को ‘अधर पणा’ अनुष्ठान संपन्न होगा। मान्यता है कि रथयात्रा के दौरान देव-दावन के साथ पवित्र आत्माएं भी आती हैं। इन पवित्र आत्माओं को पणा (शर्बत) अर्पित किया जाता है और इसके सेवन के बाद वे अपने-अपने स्थान को प्रस्थान करती हैं।  रथों पर विशेष पात्रों में अधर पणा अर्पित किया जाएगा। इसके बाद 27 जुलाई को ‘नीलाद्रि बीजे’ की परंपरा के साथ महाप्रभु और उनके सहोदर देव-देवी पुनः श्रीमंदिर में प्रवेश करेंगे और माता लक्ष्मी को मनाने के लिए वह रसगुल्ला भोग खिलाएंगे। इसके बाद वह रत्न वेदी पर विराजित होंगे। इसी के साथ विश्वविख्यात रथयात्रा महापर्व की सभी धार्मिक नीतियां विधिवत पूर्ण हो जाएंगी।

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