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महानदी अपतटीय बेसिन में पहले मूल्यांकन कुएं की ड्रिलिंग शुरू
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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी बोले– ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम
भुवनेश्वर। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए महानदी अपतटीय बेसिन में पहले मूल्यांकन (एप्रेज़ल) कुएं की ड्रिलिंग शुरू हो गई है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे ऊर्जा आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया।
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को महानदी अपतटीय बेसिन में पहले मूल्यांकन कुएं एमएन-डीडब्ल्यूएन18-1-एचडी की ड्रिलिंग शुरू होने की जानकारी दी।
मंत्री ने इस अवसर को “ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भारत की यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत” बताते हुए कहा कि ड्रिलिंग की शुरुआत एक दशक के दूरदर्शी सुधारों का परिणाम है। इन सुधारों ने भारत के अन्वेषण और उत्पादन परिदृश्य को बदल दिया है।
नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों का पता लगाया जाएगा
महानदी अपतटीय बेसिन में शुरू हो रहा एमएन-डीडब्ल्यूएन18-1-एचडी मूल्यांकन कुआं भारत के सबसे संभावित अपतटीय बेसिनों में से एक का व्यवस्थित मूल्यांकन करने के लिए चार गहरे पानी के कुओं में से पहला है। इस ड्रिलिंग कार्यक्रम में विश्व स्तरीय गहरे पानी की ड्रिलिंग तकनीक का उपयोग करके नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों का पता लगाया जाएगा और भारत की घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने ऐतिहासिक नीतिगत और नियामक सुधारों के माध्यम से अन्वेषण और उत्पादन तंत्र को बिल्कुल से बदल दिया है।
गहरे समुद्र में चार कुओं की योजना का पहला चरण
पुरी ने कहा कि महानदी अपतटीय बेसिन में शुरू हुआ यह मूल्यांकन कुआं गहरे समुद्र में प्रस्तावित चार मूल्यांकन कुओं में पहला है। इन कुओं के माध्यम से देश के सबसे संभावनाशील अपतटीय क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन भंडार का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। ड्रिलिंग के लिए अत्याधुनिक गहरे समुद्र की तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे नए तेल और गैस संसाधनों का पता लगाने में मदद मिलेगी।
एक दशक के सुधारों का परिणाम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले दस वर्षों में केंद्र सरकार ने तेल एवं गैस अन्वेषण क्षेत्र में व्यापक नीतिगत और नियामकीय सुधार किए हैं। उन्होंने बताया कि हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति (एचईएलपी) लागू की गई, नामांकन आधारित व्यवस्था के स्थान पर ओपन एकरेज लाइसेंसिंग कार्यक्रम (ओएएलपी) शुरू किया गया, पारदर्शी राजस्व साझेदारी प्रणाली अपनाई गई तथा पहले प्रतिबंधित रहे लगभग 99 प्रतिशत अपतटीय क्षेत्रों को अन्वेषण के लिए खोल दिया गया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश के सक्रिय अन्वेषण क्षेत्र का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा वर्ष 2014 के बाद आवंटित किया गया है, जो निवेशकों और अन्वेषण कंपनियों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
वैज्ञानिक अन्वेषण पर विशेष जोर
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सरकार ने मिशन अन्वेषण, राष्ट्रीय भूकंपीय कार्यक्रम, विस्तारित महाद्वीपीय शेल्फ सर्वेक्षण, राष्ट्रीय डेटा भंडार तथा हाइड्रोकार्बन संसाधन आकलन अध्ययन जैसी परियोजनाओं के माध्यम से भू-वैज्ञानिक आंकड़ों का विशाल आधार तैयार किया है। इससे देश के नए अपतटीय क्षेत्रों में तेल एवं गैस की खोज को गति मिलेगी।
ओएएलपी के तहत 172 ब्लॉक आवंटित
उन्होंने बताया कि ओपन एकरेज लाइसेंसिंग कार्यक्रम (ओएएलपी) के तहत अब तक लगभग 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 172 अन्वेषण ब्लॉक आवंटित किए जा चुके हैं, जिनमें 4.3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक 674 कुओं की ड्रिलिंग की गई, पांच नई खोजें हुईं और सात खोजों का व्यावसायिक दोहन शुरू किया गया।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की रणनीति नई तेल एवं गैस खोजों के साथ-साथ मौजूदा भंडार से अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने की है। इसके लिए आधुनिक तकनीकों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने ओएनजीसी, ऑयल इंडिया लिमिटेड, हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय, तकनीकी साझेदारों और सभी भू-वैज्ञानिकों, इंजीनियरों तथा अपतटीय विशेषज्ञों को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि महानदी अपतटीय बेसिन में शुरू हुई यह ड्रिलिंग भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगी।
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