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रथों पर स्वर्ण आभूषणों से सजे विराजे तीनों देव
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श्रीगुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर लौटने के बाद रथों पर हुआ भव्य श्रृंगार
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सोने के मुकुट, कुंडल, हार से सुसज्जित हुए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा
पुरी। श्रीगुंडिचा मंदिर में अपने जन्मस्थान की यात्रा पूरी कर श्रीमंदिर लौटे महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा ने शनिवार को रथों पर सोना वेश में भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। तीनों देवों को सिर से लेकर चरण तक विभिन्न स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत किया गया। रथों पर स्वर्णिम आभा में विराजमान महाप्रभु और उनके सहोदर देव-देवी के दर्शन के लिए पुरी में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
सोना वेश रथयात्रा के सबसे प्रमुख और आकर्षक अनुष्ठानों में से एक है। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन को पारंपरिक स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाता है। भगवानों का यह राजसी स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।
मुकुट से लेकर आयुध तक सोने की चमक
सोना वेश में महाप्रभु के श्रृंगार में अनेक पारंपरिक स्वर्ण आभूषण शामिल होते हैं। भगवानों को आभूषणों से सजाया जाता है। इसके अलावा भगवान बलभद्र के हल-मूसल, सुदर्शन का चक्र और अन्य पारंपरिक स्वर्ण अलंकारों से सुसज्जित किए जाते हैं।
स्वर्ण मुकुट, विशाल हार, कुंडल, हाथ-पैर के स्वर्ण अंग और विभिन्न राजचिह्नों से सजे तीनों देवों का स्वरूप देखते ही बनता है। सोना वेश में भगवान जगन्नाथ का राजसी स्वरूप श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और आध्यात्मिक भाव को और गहरा कर देता है।
रथों पर ही होते हैं सोना वेश के दर्शन
इस अनुष्ठान की विशेषता यह है कि महाप्रभु और उनके सहोदर देव-देवी श्रीमंदिर में प्रवेश करने से पहले रथों पर ही सोना वेश धारण करते हैं। श्रीगुंडिचा मंदिर से लौटने के बाद रथों पर विराजमान तीनों देवों के इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।
सोना वेश के दौरान उपयोग होने वाले अनेक स्वर्ण आभूषण श्रीमंदिर के रत्न भंडार में सुरक्षित रखे जाते हैं। इस वर्ष रत्न भंडार के आभूषणों की सूची तैयार करने और उनका डिजिटल अभिलेखीकरण करने की प्रक्रिया भी चल रही है।
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