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एससीईआरटी ने संशोधित संस्करण तैयार करने के लिए जारी किया टेंडर
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मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद सरकार की पहल
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अगले शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को मिलेंगी त्रुटिरहित पुस्तकें
भुवनेश्वर। स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आने और इस पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की नाराजगी के बाद ओडिशा सरकार ने पुस्तकों को पूरी तरह संशोधित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने त्रुटिरहित पाठ्यपुस्तकों के नए संस्करण तैयार करने के लिए टेंडर जारी किया है, ताकि अगले शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को सही और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।
स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग को पाठ्यपुस्तकों में अनेक तथ्यात्मक, भाषाई और विषयवस्तु संबंधी गलतियों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा था। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने पूरे मामले की समीक्षा कर पुस्तकों के व्यापक संशोधन का निर्णय लिया।
इसी कड़ी में एससीईआरटी ने 7 से 13 जुलाई तक एक सप्ताह का कार्यशाला आयोजित किया, जिसमें राज्यभर के विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान ओड़िया, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, हिंदी, संस्कृत, कला शिक्षा, शारीरिक शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा सहित 11 विषयों की पुस्तकों की समीक्षा की गई। विशेषज्ञों ने पुस्तकों में मौजूद त्रुटियों की पहचान कर आवश्यक संशोधन, जोड़ और हटाने की सिफारिश की।
इन सिफारिशों को लागू करने के लिए एससीईआरटी ने 20 जुलाई को निजी एजेंसियों और प्रिंटिंग संस्थानों से निविदाएं आमंत्रित की हैं। टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 26 जुलाई निर्धारित की गई है, जबकि तकनीकी निविदाएं 27 जुलाई को खोली जाएंगी। चयनित एजेंसी को कार्यादेश मिलने के एक माह के भीतर संशोधन का पूरा काम पूरा करना होगा।
टेंडर की शर्तों के अनुसार, चयनित एजेंसी एससीईआरटी के पाठ्यक्रम विकास प्रकोष्ठ से पाठ्यपुस्तकों और डिजिटल पांडुलिपियां प्राप्त करेगी। संशोधित पांडुलिपि का पहला मसौदा सात दिनों के भीतर विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। विशेषज्ञों की टिप्पणियों के आधार पर आवश्यक बदलाव किए जाएंगे और अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही पुस्तकों को मुद्रण के लिए भेजा जाएगा।
एससीईआरटी ने स्पष्ट किया है कि संशोधित पुस्तकों की कई स्तरों पर जांच की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि शेष न रहे। पूरी प्रक्रिया की निगरानी पाठ्यक्रम विकास प्रकोष्ठ करेगा और कार्य संतोषजनक ढंग से पूरा होने के बाद ही एजेंसी को भुगतान किया जाएगा। अग्रिम भुगतान का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है।
चयनित एजेंसी को संपादन, डीटीपी, पेज डिजाइन, आवरण निर्माण, चित्रांकन, मुद्रण, बाइंडिंग, पैकेजिंग और परिवहन की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। पुस्तकें ओड़िया, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत और उर्दू भाषाओं में तैयार की जाएंगी। साथ ही प्रत्येक पुस्तक की संपादन योग्य डिजिटल फाइल और पीडीएफ प्रति भी एससीईआरटी को उपलब्ध करानी होगी।
अधिकारियों के अनुसार, यदि प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है तो सितंबर-अक्टूबर तक संशोधित पाठ्यपुस्तकें तैयार हो जाएंगी। इसके बाद उनका मुद्रण और वितरण शुरू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में विद्यार्थियों को त्रुटिरहित और गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हों तथा राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का विश्वास और मजबूत हो।
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