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25 जुलाई को पेश होने का आदेश
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स्वामी लक्ष्मणानंद हत्याकांड जांच आयोग की रिपोर्ट गायब होने के मामले में पुलिस का शिकंजा कसा
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पूर्व अधिकारियों से भी पूछताछ जारी
भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से संवेदनशील न्यायिक आयोगों की रिपोर्टों के कथित रूप से गायब होने के मामले की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने पूर्व बीजद नेता और पूर्व आईएएस अधिकारी वी कार्तिकेय पांडियन को नोटिस जारी कर 25 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे भुवनेश्वर के एसीपी, जोन-1 के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
यह नोटिस कैपिटल थाना कांड संख्या-460 के तहत दर्ज मामले से जुड़ा है, जिसमें 2008 के स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती हत्याकांड और कंधमाल हिंसा की जांच करने वाले न्यायमूर्ति एएस नायडू आयोग की रिपोर्ट के कथित रूप से गायब होने की जांच की जा रही है।
बताया गया है कि यह विस्तृत आयोग रिपोर्ट वर्ष 2016 में राज्य सरकार को सौंपी गई थी और बाद में मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई थी। हालांकि, 2024 में सरकार परिवर्तन के दौरान यह रिपोर्ट रिकॉर्ड में नहीं मिली।
10 जून को दर्ज हुई थी एफआईआर
इस मामले में ओडिशा गृह विभाग की शिकायत पर 10 जून 2026 को एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, नायडू आयोग की रिपोर्ट के साथ-साथ 2016 के एसयूएम अस्पताल अग्निकांड की जांच रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री कार्यालय से लापता पाई गई।
पुलिस के अनुसार, जून 2024 में चुनाव परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से कई अन्य फाइलें गृह विभाग को लौटा दी गई थीं, लेकिन ये दोनों महत्वपूर्ण रिपोर्टें नहीं मिलीं। इससे सरकारी अभिलेखों के संरक्षण और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
पूर्व अधिकारियों से भी पूछताछ
जांच के दौरान पूर्व आईटी सचिव मनोज कुमार मिश्र और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राजेश वर्मा (वर्तमान में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष) को भी 22 जुलाई को जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया था।
मनोज कुमार मिश्र पहले ही 18 जुलाई को पुलिस के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रख चुके हैं। वहीं, राजेश वर्मा निर्धारित समय तक उपस्थित नहीं हुए, जिसके बाद पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं।
जांच का दायरा बढ़ा, राजनीतिक सरगर्मी भी तेज
मामले ने ओडिशा की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। भाजपा सरकार का आरोप है कि पिछली बीजद सरकार के कार्यकाल में ये महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब हुए, जिनका संबंध राज्य के सबसे संवेदनशील मामलों में से एक स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती हत्याकांड और उसके बाद हुई कंधमाल हिंसा से है।
एफआईआर दर्ज होने के लगभग दो माह बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फाइलें कब और कैसे गायब हुईं तथा क्या उन्हें जानबूझकर हटाया या नष्ट किया गया।
अब 25 जुलाई को वीके पांडियन की प्रस्तावित पेशी और राजेश वर्मा की अनुपस्थिति के बाद इस मामले की जांच में नए खुलासों की संभावना को लेकर सभी की नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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