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छात्रों की चिंता पर उच्च शिक्षा विभाग ने दिया स्पष्टीकरण
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सीबीएसई के पुनर्मूल्यांकन में बढ़े अंक
भुवनेश्वर। ओडिशा में प्लस-3 (स्नातक) प्रवेश की दूसरी कट-ऑफ सूची में कई प्रतिष्ठित कॉलेजों और विषयों की कट-ऑफ पहली सूची से अधिक होने पर उठे सवालों के बीच उच्च शिक्षा विभाग ने इसका कारण स्पष्ट किया है। विभाग के अनुसार, इस बार सीबीएसई के पुनर्मूल्यांकन (री-एडिशन) के बाद कई विद्यार्थियों के अंक बढ़ने, पहली बार ‘अल्टर’ विकल्प शुरू किए जाने तथा दूसरी चयन सूची से पहले दोबारा चॉइस फिलिंग का अवसर देने के कारण दूसरी सूची की कट-ऑफ कई स्थानों पर बढ़ गई।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष सीबीएसई की ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली को लेकर विवाद के बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने पुनर्मूल्यांकन कराया, जिससे अनेक छात्रों के अंक बढ़ गए। इन संशोधित अंकों का प्रभाव दूसरी चयन सूची पर पड़ा और कई पाठ्यक्रमों में कट-ऑफ पहले से अधिक हो गई।
पहली बार ‘अल्टर’ विकल्प लागू
उच्च शिक्षा विभाग के सूत्रों ने बताया कि इस वर्ष ज्ञानोदय योजना के तहत पहली बार ‘अल्टर’ विकल्प लागू किया गया। इसके तहत पहली चयन सूची में पहली पसंद का कॉलेज मिलने के बावजूद छात्र अपनी पसंद के कॉलेज और विषय में बदलाव कर सके। इससे सीटों का पुनर्वितरण हुआ और दूसरी सूची में कई लोकप्रिय कॉलेजों की कट-ऑफ अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई।
दोबारा चॉइस फिलिंग का भी पड़ा असर
विभाग के अनुसार, दूसरी चयन सूची से पहले विद्यार्थियों को एक बार फिर चॉइस फिलिंग का अवसर दिया गया। इससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले कई छात्रों ने अपनी प्राथमिकताएं बदलीं और प्रतिष्ठित कॉलेजों एवं लोकप्रिय विषयों का चयन किया। परिणामस्वरूप दूसरी सूची में कुछ कॉलेजों और विषयों की कट-ऑफ पहली सूची से भी ऊपर चली गई।
छात्रों और अभिभावकों में थी नाराजगी
दूसरी कट-ऑफ सूची जारी होने के बाद कई छात्र और अभिभावक हैरान थे, क्योंकि सामान्यतः दूसरी सूची में कट-ऑफ कम होने की उम्मीद रहती है। इस पर भी कई विद्यार्थियों ने प्रवेश प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और कट-ऑफ बढ़ने के कारण सार्वजनिक करने की मांग की थी।
अब विभाग के स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि पुनर्मूल्यांकन में बढ़े अंक, ‘अल्टर’ विकल्प और दोबारा चॉइस फिलिंग इस वर्ष दूसरी मेरिट सूची में कट-ऑफ बढ़ने के प्रमुख कारण रहे।
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